अपराधबोध
रात की स्याही गहराती चली जा रही थी और जमीन पर शांत लेती पटरियों पर ट्रेन धड़धड़ाती हुई भागती चली जा रही थी— जमीन के सीने पर कंपकंपाहट के...Read More
कश्मीर यात्रा के अनुभव: कश्मीर मैं तीस साल पहले रह चुका हूँ, जब यहां हालात इतने बुरे थे कि कोई सरकार ही नहीं थी और सबकुछ फौज के कंट्रोल मे...