गंदा है पर धंधा है यह- जिगोलो

कैसे होता है जिगोलो का धंधा 

अखबार या नेट पर लड़कियों/महिलाओं के साथ मौजमस्ती करके भी पैसे कमाने के लुभावने ऑफर आप में से ज्यादातर लोगों ने देखे होंगे, कइयों के मन को यह विज्ञापन गुदगुदाये भी होंगे और कईयों ने इसमें अपने लिये संभावनायें भी तलाशी होंगी। दरअसल यह मेल प्रास्टीच्यूशन के कदरन नये धंधे से सम्बंधित विज्ञापन होते हैं जो इस धंधे को ऑर्गेनाइज करने वाली एजेंसियों की तरफ से दिये जाते हैं।


अब तक इस जिस्मफरोशी के धंधे में लोग महिलाओं को ही एक्सपेक्ट करते आये हैं लेकिन अब भारत में भी आधुनिक दुनिया की तरह पुरुषों का जिस्मफरोशी का बाजार सजने लगा है जिसकी शुरुआत तो नब्बे के बाद से हो चुकी थी लेकिन धीरे-धीरे मजबूती अख्तियार करता यह धंधा अब पूरी तरह ऑर्गेनाइज हो चुका है और इस बाजार में ढेरों एजेंसीज स्थापित हो चुकी हैं। जरूरत या शौक के मारे वे तमाम युवक इनसे जुड़ कर इस धंधे में कूद जाते हैं जिन्हें हम सामान्य भाषा में जिगोलो, मेल एस्कार्ट या पुरुष वेश्या कहते हैं।


वैसे प्राॅपर रूप से इस लाईन में जुड़ने के लिये हल्की फुल्की ट्रेनिंग दी जाती है किसी भूतपूर्व जिगोलो द्रारा जहां शक्ल उतनी मायने नहीं रखती बल्कि शरीर, क्षमता, बातचीत और व्यवहार ज्यादा मायने रखता है क्योंकि इस लाईन में ज्यादातर कस्टमर एलीट क्लास से होती हैं.. जिगोलो का मतलब यह भी नहीं कि बस सीधे कस्टमर पर चढ़ दौड़ना है जैसा अमूमन महिला वेश्यावृत्ति में होता है। जिगोलो का मेन गोल होता है कि वह कस्टमर को उसकी मर्जी और ख्वाहिश के हिसाब से संतुष्ट करे।


इनकी कस्टमर्स में हालांकि सभी वर्ग की लड़कियां/महिलायें हो सकती हैं लेकिन ज्यादातर शादीशुदा औरतें होती हैं। बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि कोई लड़की/महिला तो जब चाहे तब उसे भोगने के लिये पुरुष मिल जायेगा, फिर उसे खरीदने की क्या तुक है लेकिन इसकी वजह मर्द की पजेसिव तबियत और कस्टमर के लिये सुरक्षा का भाव है जो किसी शौकीन या मजबूर लड़की/महिला को एक परमानेंट सरदर्द पालने की जगह जिगोलो के सुरक्षित ऑप्शन पर जाने को मजबूर करता है।


दिल्ली में ही कई स्पा, पार्लर, डिस्कोथेक, क्लब, काॅफी हाऊस जैसी जगहें हो गयीं हैं या सरोजनी नगर, कमला नगर मार्केट, पालिका बाजार, लाजपत नगर, जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर, साउथ एक्सटेंशन, जेएनयू रोड, अंसल प्लाजा, आईएनए जैसी कई ओपन मार्केट मौजूद हैं, जहां जिगोलो की उपलब्धता रहती है, यहां बाकायदा उनकी बोलियां भी लगती हैं और सौदेबाजी भी होती है। इसके सिवा वे एक फोन काॅल पर भी मनचाही जगह पर उपलब्ध हो जाते हैं। मर्दों का यह बाजार रात दस बजे से चार बजे तक चलता है। यहां बाकायदा जिगोलो ट्रेनर, कोऑर्डिनेटर, एंजेसीज और कंपनी तक अपनी हिस्सेदारी के लिये मौजूद हैं और एक तयशुदा कमीशन पर नये-नये लड़के यह काम धड़ल्ले से कर रहे हैं।


इनका एक ड्रेस कोड होता है और पहचान के लिये गले में पट्टा या रुमाल रहता है। इनकी डिमांड इनके पट्टे या रुमाल की लंबाई से भी तय होती है। सस्ते जिगोलो तो हजार रुपये में भी उपलब्ध रहते हैं.. हालांकि इनकी नार्मल बुकिंग कुछ घंटों के लिये 1800 से तीन हजार और फुल नाइट के लिये 8000 तक की होती है लेकिन अगर बंदा बढ़िया फिजिक वाला है तो उसे पंद्रह हजार तक की कीमत भी मिल जाती है। कोई जाना पहचाना इस लाईन का सुपर स्टार यानि टाॅप मोस्ट बंदा हो तो पच्चीस से तीस हजार तक भी एक रात के कमा लेता है।


यहां एक बात यह भी गौरतलब है कि वह जिस एजेंसी से जुड़ा होता है, अपनी बीस प्रतिशत कमाई उस एजेंसी को भी देनी होती है। तमाम लोग बिना एजेंसियों के इंडीविजुअली भी धंधा करते हैं लेकिन उसमें कस्टमर के लिये काफी संघर्ष करना पड़ता है जबकि एजेंसियों की मार्फत लगातार काम मिलने की गुंजाइश बनी रहती है। एजेंसियां भी नये फ्रेश माल की तलाश में लगातार विज्ञापनों के जरिये नये लड़कों तक पहुंच बनाने में लगी रहती हैं।

अब इसके कुछ निगेटिव पक्ष को भी समझें.. पहली बात तो यह कि महिला वेश्यावृत्ति की तरह यह धंधा भी समाज में स्वीकार्य नहीं है तो लोगों को पता चलने पर बुरी तरह बदनामी का डर रहता है और इस वजह से इस धंधे में उतरने वाले हर युवक को अपनी यह नई पहचान छुपा कर रखनी पड़ती है। इसमें कई बार किसी निजी वजह से चिढ़ी हुई या कुंठित ग्राहक पैसे के बदले बुरी तरह प्रताड़ित भी करती हैं। फिर यह शायद अकेला ऐसा धंधा होगा जिसके नाम पर सबसे ज्यादा धोखाधड़ी होती है। धंधे से जुड़ने के लिये दिये जाने वाले ज्यादातर विज्ञापन फ्राॅड होते हैं जिनके शिकार लालच में आये लोग बड़े पैमाने पर होते हैं।

बाकी इस विषय पर मनोरंजन के साथ कुछ ज्यादा पढ़ने के लिये मेरी किताब Junior Gigolo/ जूनियर जिगोलो भी पढ़ सकते हैं 😎

Written by Ashfaq Ahmad

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