मिरोव / Mirov

  

MIROV 1: The Memory of a Lost World

जब यादें बदल जायें, तो सच क्या रहेगा?

एक आदमी जो चार सौ साल बाद जागता है…
एक दूसरा जो सौ साल बाद भी सिर्फ चार दिन बूढ़ा होता है…
और एक ऐसी दुनिया, जो हमारी दुनिया नहीं है— लेकिन उससे जुड़ी हुई है।

MIROV ट्रिलॉजी की शुरुआत एक साधारण लेकिन गहराई में बेहद जटिल सवाल से होती है— अगर आपकी पहचान, आपकी यादें और आपकी दुनिया— तीनों एक साथ बदल जायें, तो आप खुद को किस आधार पर पहचानेंगे?

सन 2032, न्यूयॉर्क। एडगर वैलेंस एक बेंच पर जागता है— लेकिन जो दुनिया वह देख रहा है, वह उसकी नहीं है। उसकी आईडी कहती है कि वह एक अमेरिकन है, मगर उसकी यादें उसे भारत के एक गांव में ले जाती हैं— मुगलकाल में, जहांगीर के दौर में। वह दो दुनियाओं के बीच फंसा हुआ है— एक आधुनिक, एक ऐतिहासिक— और दोनों ही उसके अपने होने का दावा करती हैं।

यहाँ से कहानी केवल पहचान की उलझन तक सीमित नहीं रहती। एडगर को धीरे-धीरे यह एहसास होता है कि उसकी क्षमताएं, उसका शरीर, यहां तक कि उसका जेंडर भी उस व्यक्ति से मेल नहीं खाता जिसे वह खुद समझता था। उसकी ज़िंदगी में ऐसे लोग प्रवेश करते हैं जो दावा करते हैं कि उसने उनके सिंडीकेट के एक बड़े मुखिया की हत्या की है और अरबों डॉलर चुरा लिये हैं— जबकि उसे यह तक याद नहीं कि वह उन्हें जानता है।

इसके समानांतर एक और परत खुलती है— एक ऐसा खजाना, जो चार सौ साल पहले दुनिया भर से लूटे गये बेशकीमती जवाहरात और कलाकृतियों से बना था। यह खजाना इतिहास में अफवाह माना गया, लेकिन एडगर जानता है कि यह सच है— क्योंकि वह खुद इसे दफना चुका था। और उससे भी ज्यादा विचित्र बात यह है कि उसे उस जगह का रास्ता आज भी याद है।

यहीं से MIROV की कहानी व्यक्तिगत संघर्ष से निकलकर वैश्विक और फिर कॉस्मिक स्तर तक फैलने लगती है। क्योंकि यह खजाना सिर्फ धन का मामला नहीं है— यह उस जगह तक पहुंचने की कुंजी है, जो इस दुनिया की नहीं है।



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MIROV 2: The World Beyond the Gate

जब दुनिया के दरवाजे खुलते हैं


MIROV का दूसरा हिस्सा कहानी को एक नए आयाम में ले जाता है। यहां केविन नाम का एक व्यक्ति सामने आता है— जो सौ साल पहले गायब हुआ था और अचानक लौट आता है। लेकिन उसके हिसाब से वह सिर्फ चार दिन के लिये गायब था।

यह समय की रैखिकता पर पहला बड़ा प्रहार है।

इस घटना को समझने के लिये SETI और अन्य शोधकर्ता एक मिशन लॉन्च करते हैं, जो उन्हें भारत के कुमाऊँ की घाटियों तक ले जाता है। यहां से कहानी विज्ञान, इतिहास और षड्यंत्र के त्रिकोण में प्रवेश करती है।

दूसरी तरफ, एमसाना, मथायस, और एवलिन जैसे किरदारों के बीच एक वैश्विक टकराव शुरू हो जाता है, जिसमें न्यूयॉर्क तक युद्ध का मैदान बन जाता है। इस संघर्ष में एक ऐसी एंटिटी हस्तक्षेप करती है, जो इस दुनिया की नहीं है— और जो मानवता को भविष्य के एक बड़े खतरे के प्रति चेतावनी देने की कोशिश कर रही है।

साथ ही, अलग-अलग देशों की एजेंसियां— फ्रांस, इंग्लैंड, नीदरलैंड और भारत— एक ही दिशा में बढ़ने लगती हैं। वजह है— वे ऐतिहासिक धरोहरें जो कभी गायब हो गई थीं और अब अचानक बाजार में बिकती दिखाई दे रही हैं।

इन सभी रास्तों का अंत एक ही जगह पर होता है— उत्तराखंड की उन घाटियों में, जहां ‘शकराल’ नाम की एक जगह होने का दावा किया जाता है, लेकिन जो आधिकारिक तौर पर अस्तित्व में ही नहीं है।

पांच अलग-अलग टीमें, अलग-अलग उद्देश्यों के साथ, एक ही गंतव्य की ओर बढ़ती हैं— और अंततः वे उस बिंदु तक पहुंचती हैं जहां हमारी दुनिया समाप्त होती है।

और वहीं से शुरू होती है— एक दूसरी दुनिया।



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MIROV 3: The Architects of the Universe

जब यूनिवर्स खुद सवाल बन जाता है


MIROV का तीसरा भाग पूरी ट्रिलॉजी को एक कॉस्मिक स्केल पर ले जाता है।

यहां पात्र एक ऐसे यूनिवर्स में प्रवेश करते हैं जो हमारी समझ से परे है। यहां स्पेस नहीं है— लेकिन दूरी है। यहां यात्रा के नियम अलग हैं। यहां वास्तविकता का अनुभव मस्तिष्क की सीमाओं से नियंत्रित होता है— यानि जो दिखता है, वह उतना ही सच है जितना भ्रम।

इस यूनिवर्स में कई प्रजातियां हैं— हर एक अपने-अपने क्षेत्र में प्रभुत्व रखती है। लेकिन तीन शक्तिशाली समूह— पस्कियन, ग्रेवोर्स और स्कैंडीज— पूरे यूनिवर्स के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं और एक-दूसरे के कट्टर विरोधी हैं।

इनके बीच एक चौथी प्रजाति एड्रयूसिनॉस— वैज्ञानिक रूप से सबसे उन्नत है। वे इस यूनिवर्स के डिजाइन में खामियां देखते हैं और इसे सुधारने के लिये एक कॉस्मिक इंजन बनाते हैं— जो पूरे यूनिवर्स को रीडिजाइन कर सकता है।

लेकिन यही प्रयोग एक भयानक परिणाम लेकर आता है— एक शैडो यूनिवर्स का आंशिक पतन, जिसके कारण ‘बूटीस वॉइड’ जैसी विशाल संरचना बनती है।

जब यह तकनीक बाकी शक्तियों के सामने आती है, तो वे इसे अपने नियंत्रण में लेना चाहते हैं। एक महायुद्ध होता है— जिसमें एड्रियूसिनॉस लगभग समाप्त हो जाते हैं। लेकिन अपनी हार से पहले वे उस कॉस्मिक इंजन को चार हिस्सों में बांट कर अलग-अलग खतरनाक क्षेत्रों में छुपा देते हैं।

इसके बाद कहानी एक नई दिशा लेती है— इन हिस्सों की खोज।

तीनों शक्तियां इन हिस्सों को हासिल करना चाहती हैं, लेकिन उनके उद्देश्य अलग हैं। कोई यूनिवर्स को अपने हिसाब से बदलना चाहता है, तो कोई उसे वैसा ही बनाए रखना चाहता है… और यहीं पर इंसानों की भूमिका सामने आती है।

इंसान इस यूनिवर्स के लिये अनपेक्षित हैं— न तो पूरी तरह जुड़े हुए, न ही पूरी तरह अलग। यही कारण है कि वे इस संघर्ष में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी है— जब दिमाग खुद ही वास्तविकता को गढ़ रहा हो, तो सच क्या है? जो देखा जा रहा है… या जो समझा जा रहा है?



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ट्रिलॉजी का संयुक्त सार

MIROV ट्रिलॉजी केवल एक साइंस-फिक्शन कहानी नहीं है। यह तीन स्तरों पर चलने वाली एक संरचना है—

  1. व्यक्तिगत स्तर— पहचान, स्मृति और अस्तित्व

  2. वैश्विक स्तर— सत्ता, षड्यंत्र और इतिहास

  3. कॉस्मिक स्तर— यूनिवर्स, वास्तविकता और नियंत्रण

पहले भाग में कहानी एक व्यक्ति की उलझन से शुरू होती है।
दूसरे में वह दुनिया और उसके रहस्यों तक फैलती है।
और तीसरे में वह पूरी सृष्टि के ढांचे तक पहुंच जाती है।

यह ट्रिलॉजी एक यात्रा है— जहां हर जवाब एक नए सवाल को जन्म देता है, और हर सच के पीछे एक परत और छुपी होती है।

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