क्या एक ही स्थान पर कई ब्रह्मांड मौजूद हो सकते हैं? | भाग 1
क्या हमारे आसपास एक साथ कई ब्रह्मांड हो सकते हैं?
आमतौर पर मैं हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं देता, लेकिन कुछ चीजें मुझे खीज से भर देती हैं। उनमें एक यह है कि जब हम व्यावहारिक विज्ञान की बात कर रहे होते हैं, तो कुछ लोग उसमें दर्शन और अध्यात्म को शामिल करके उन सवालों के जवाब देने लगते हैं, जिन पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विचार किया जाना चाहिए। इसी तरह, कुछ लोग बिना सवाल उठाए पुरानी धारणाओं को दोहराते रहते हैं— जैसे ब्रह्मांड अनंत है, उसकी कोई सीमा नहीं है और अंतरिक्ष लगातार फैल रहा है।
लेकिन क्या इन बातों को दोहराने के बजाय हम दूसरी संभावनाओं पर विचार नहीं कर सकते? विज्ञान की प्रगति के लिए सवाल पूछना और नए विचारों की जाँच करना आवश्यक है। किसी विचार से असहमत होना अलग बात है, लेकिन उसे समझे बिना खारिज कर देना दूसरी।
यहाँ मैं एक परिकल्पना प्रस्तुत कर रहा हूँ। इसका उद्देश्य किसी स्थापित वैज्ञानिक सिद्धांत को अंतिम सत्य बताना नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की प्रकृति और उसके संभावित स्वरूप पर एक वैकल्पिक कल्पना के माध्यम से विचार करना है।
एक बड़े हॉल की कल्पना कीजिए
इस पूरी व्यवस्था को समझने के लिए हम इसे तीन अलग-अलग स्तरों पर देखेंगे। हर स्तर पर आकार, संरचना और समय के पैमाने को छोटा करके समझने की कोशिश करेंगे। कल्पना कीजिए कि हमारे मॉडल में एक घंटे के भीतर एक अरब वर्ष बीत जाते हैं। यह केवल समझने की सुविधा के लिए बनाया गया पैमाना है, वास्तविक ब्रह्मांड में समय की प्रकृति के बारे में कोई वैज्ञानिक दावा नहीं।
अब एक विशाल हॉल की कल्पना कीजिए, जो चारों ओर से बंद है और जिसके भीतर तरह-तरह का कबाड़ बिखरा हुआ है। मान लीजिए कि किसी प्रक्रिया के कारण उस हॉल के भीतर दबाव पैदा होता है। इस दबाव से वहाँ मौजूद पदार्थ की अवस्था बदलने लगती है और वह गतिशील हो जाता है।
इस कल्पना को आगे बढ़ाते हुए मान लीजिए कि पदार्थ के कुछ हिस्से गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से सिमटने लगते हैं और ब्लैक होल जैसी संरचनाएँ बनती हैं। ये संरचनाएँ अपने आसपास के पदार्थ को खींचती हैं। अंततः पदार्थ अत्यधिक सघन अवस्था तक पहुँचता है, जिसे इस मॉडल में सिंगुलैरिटी के रूप में समझा गया है। फिर किसी प्रक्रिया के कारण वह पदार्थ बाहर निकलता है और एक नए ब्रह्मांड की शुरुआत होती है।
इस कल्पना में ब्रह्मांड का निर्माण किसी एक बार होने वाली घटना के बजाय एक चक्र का हिस्सा है। पदार्थ एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जाता है, नई संरचनाएँ बनती हैं और उनके भीतर आगे चलकर नए ब्रह्मांडों के जन्म की संभावना पैदा होती है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ब्लैक होल के भीतर पदार्थ के सिंगुलैरिटी तक पहुँचने और फिर उससे एक नया ब्रह्मांड जन्म लेने की यह प्रक्रिया स्थापित वैज्ञानिक तथ्य नहीं है। यहाँ इसे एक काल्पनिक मॉडल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या एक ब्रह्मांड दूसरे ब्रह्मांड का पदार्थ निगल सकता है?
अब इस मॉडल की दूसरी संभावना पर विचार कीजिए। हॉल के भीतर यह प्रक्रिया केवल एक बार नहीं होती, बल्कि लगातार चलती रहती है। एक ब्रह्मांड का पदार्थ फैलता है, उसकी संरचना बदलती है और वह अंततः किसी संभावित अंतिम अवस्था तक पहुँच सकता है। इसी दौरान किसी अन्य क्षेत्र में मौजूद ब्लैक होल दूसरे ब्रह्मांडों के पदार्थ को भी अपने भीतर समेट सकता है।
कल्पना कीजिए कि किसी ब्लैक होल ने एक ही ब्रह्मांड का नहीं, बल्कि कई ब्रह्मांडों का पदार्थ अपने भीतर समेट लिया। इस मॉडल में उस पदार्थ को अत्यधिक संकुचित करने के बाद उसकी संरचना और गुण बदल जाते हैं। फिर जब वह पदार्थ बाहर निकलता है, तो उससे बनने वाला ब्रह्मांड उन सभी ब्रह्मांडों से अलग हो सकता है, जिनसे उसका पदार्थ आया था।
इसे चार अलग-अलग रंगों को मिलाकर पाँचवाँ रंग बनाने की कल्पना से समझ सकते हैं। नए रंग के गुण उसके मूल रंगों से अलग होंगे। इसी तरह, इस परिकल्पना में नए ब्रह्मांड का पदार्थ अपने पुराने स्वरूप से अलग गुण प्राप्त कर सकता है।
इस प्रकार, हॉल के भीतर सैकड़ों ब्रह्मांडों की कल्पना की जा सकती है, जिनमें से कोई एक समाप्त हो रहा हो और कोई दूसरा जन्म ले रहा हो। लेकिन उन सभी को एक ही समय पर देख पाना या उनके बीच होने वाली प्रक्रियाओं का पता लगा पाना हमारे लिए संभव हो, यह जरूरी नहीं।
एक ही स्थान पर कई ब्रह्मांड?
अब इस विचार का सबसे रोचक हिस्सा समझिए। यदि अलग-अलग ब्रह्मांडों में बनने वाले पदार्थ के गुण एक-दूसरे से बहुत भिन्न हों, तो संभव है कि वे एक-दूसरे के साथ किसी भी पहचाने जा सकने वाले तरीके से संपर्क न कर सकें।
इस कल्पना में चार ब्रह्मांड एक ही स्थान पर मौजूद हो सकते हैं, लेकिन उनमें से कोई भी दूसरे को देख, महसूस या पहचान नहीं सकता। यह दावा नहीं, बल्कि इस परिकल्पना के भीतर बनाई गई एक संभावना है।
उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आप अपने कमरे में सो रहे हैं। उसी स्थान पर किसी दूसरे काल्पनिक ब्रह्मांड के एक ग्रह की गुफा मौजूद है, जहाँ तापमान अत्यंत कम है। उसी स्थान पर किसी तीसरे ब्रह्मांड के एक तारे का केंद्र भी हो सकता है, जहाँ तापमान इतना अधिक है कि परमाणुओं की सामान्य संरचना कायम नहीं रह सकती।
हमारे लिए ये परिस्थितियाँ असंभव जैसी लगती हैं, क्योंकि हम अपने ब्रह्मांड के पदार्थ और उसके भौतिक नियमों के अनुसार सोचते हैं। लेकिन इस काल्पनिक मॉडल में दूसरे ब्रह्मांडों के पदार्थ के गुण इतने अलग हैं कि वे हमारे पदार्थ से संपर्क नहीं करते।
ऐसे ब्रह्मांडों को हम अलग-अलग आयामों की तरह समझने की कोशिश कर सकते हैं। यहाँ ‘आयाम’ शब्द का इस्तेमाल सामान्य अर्थ में किया गया है; यह आधुनिक भौतिकी में अतिरिक्त आयामों या समानांतर ब्रह्मांडों के अस्तित्व का प्रमाण नहीं है।
इस परिकल्पना का मूल विचार यही है कि जिसे हम पूरा ब्रह्मांड मानते हैं, वह संभवतः किसी बहुत बड़ी व्यवस्था का केवल एक हिस्सा हो सकता है। क्या वास्तव में ऐसा है? इसका उत्तर कल्पना से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रमाण और परीक्षण से ही मिल सकता है।
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