Ashfaq Ahmad
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इन्फिनिटी: द साइकिल ऑफ सिविलाइज़ेशंस

 

  • ₹230.00
  • by Ashfaq Ahmad  (Author)
  • Book: INFINITY: The Cycle of Civilizations
  • Paperback: 174 pages
  • Publisher: Gradias Publishing House
  • Language: English
  • ISBN-13: 978-81-996162-6-4
  • Product Dimensions: 22 x 14 x 2 cm

जब मानव सभ्यता को पता चलता है कि पृथ्वी उसका पहला घर नहीं थी


मानव सभ्यता के सामने सबसे पुराने प्रश्नों में से एक है—मनुष्य आया कहाँ से?

विज्ञान इसके उत्तर की तलाश विकासवाद में करता है। धर्म सृष्टि की अपनी व्याख्या प्रस्तुत करता है और दर्शन चेतना तथा अस्तित्व के प्रश्नों की ओर देखता है। लेकिन यदि इन सभी व्याख्याओं के पीछे कोई ऐसी कहानी छिपी हो, जिसकी शुरुआत पृथ्वी से ही न हुई हो?

इन्फिनिटी: द साइकिल ऑफ सिविलाइज़ेशंस इसी संभावना को अपनी कथा का आधार बनाती है।

यह विज्ञान-कथा केवल दूसरे ग्रहों और अंतरिक्ष यात्राओं की कहानी नहीं है। इसके भीतर सभ्यताओं के निर्माण, उनके पतन, स्मृतियों के मिट जाने और फिर किसी दूसरे संसार में जीवन के दोबारा शुरू होने की एक बड़ी कल्पना मौजूद है।

इस दृष्टि से मानव इतिहास किसी एक ग्रह की कहानी नहीं रह जाता। वह ब्रह्मांड में चलती हुई एक ऐसी यात्रा बन जाता है, जिसमें सभ्यताएँ जन्म लेती हैं, विकसित होती हैं, नष्ट होती हैं और फिर किसी दूसरे स्थान पर नए रूप में उभर सकती हैं।



सहरब की गुफा में छिपा असंभव रहस्य

कहानी की शुरुआत सहार्ब नामक एक प्राचीन राष्ट्र से होती है।

यह ऐसा समाज है जहाँ धर्म और परंपरा केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक जीवन और इतिहास की समझ का आधार भी बन चुके हैं। सदियों से यहाँ के लोग थास्बत नामक पैगंबर और उनसे जुड़े एक देवदूत की कथा पर विश्वास करते आए हैं।

फिर वैज्ञानिक रेमिंगवे एक प्रतिबंधित गुफा में प्रवेश करता है।

वहाँ उसे जो मिलता है, वह इतिहास और धर्म की स्थापित धारणाओं को चुनौती देने के लिए पर्याप्त है।

पत्थरों के भीतर लगभग दो हजार वर्ष पुराना एक एंड्रॉइड सुरक्षित अवस्था में मौजूद है।

उसका नाम है—सैप्रियल।

लेकिन सैप्रियल किसी प्राचीन मशीन का अवशेष भर नहीं है। वह मानव जाति के उस इतिहास का संरक्षक है, जिसे समय ने भुला दिया है।

उसके पास मौजूद संदेश बताता है कि मनुष्य इस ग्रह का मूल निवासी नहीं है।

यह खोज सहार्ब की स्थापित मान्यताओं को अचानक एक ऐसे प्रश्न के सामने खड़ा कर देती है, जिसका उत्तर केवल धार्मिक या वैज्ञानिक व्याख्याओं से नहीं दिया जा सकता।

यदि मनुष्य पृथ्वी का मूल निवासी नहीं है, तो उसका वास्तविक घर कहाँ था?


पृथ्वी से ग्रेडियस तक

सैप्रियल के रिकॉर्ड मानव इतिहास का एक ऐसा अध्याय खोलते हैं, जिसके बारे में वर्तमान सभ्यता को कोई जानकारी नहीं है।

कभी पृथ्वी मानवता का घर थी।

वहाँ जीवन था, सभ्यता थी और उन्नत तकनीक थी। लेकिन अपनी ही प्रगति और अपने ही निर्णयों के कारण मनुष्य ने उस संसार को विनाश की ओर पहुँचा दिया।

जब पृथ्वी का अस्तित्व संकट में आया, तब एडम क्रिस्टोफर और एडविना ने एक अंतिम प्रयास किया।

उनका अंतरिक्षयान था—एंडिस्टेलर।

यह यात्रा किसी साधारण खोज अभियान की तरह नहीं थी। इसका उद्देश्य था मानव जीवन को बचाने की संभावना तलाशना।

अंततः वे एक ऐसे ग्रह पर पहुँचते हैं जिसे वे ग्रेडियस नाम देते हैं।

लेकिन वहाँ पहुँचना ही सफलता नहीं थी।

उन्हें एक अनजान संसार में जीवित रहना था, और उसी के साथ मानव जीवन की निरंतरता को भी बनाए रखना था।

धीरे-धीरे एक नई मानव सभ्यता का निर्माण होता है।

पीढ़ियाँ बदलती हैं।

पुरानी स्मृतियाँ समाप्त होती जाती हैं।

और एक समय ऐसा आता है जब ग्रेडियस पर रहने वाली मानवता यह भूल चुकी होती है कि उसके पूर्वज कभी किसी दूसरे ग्रह पर रहते थे।

यहीं कहानी का एक महत्वपूर्ण विचार सामने आता है—सभ्यता अपने अस्तित्व को बचा सकती है, लेकिन अपनी उत्पत्ति की स्मृति को खो सकती है।


जब ग्रेडियस भी विनाश की ओर बढ़ता है

अतीत का रहस्य सामने आते ही वर्तमान भी संकट में घिर जाता है।

ग्रेडियस स्वयं अब जीवन के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है।

ग्रह का सबसे विशाल ज्वालामुखी मैरिड्रेनस भयानक विस्फोट के साथ सक्रिय हो उठता है।

इसका प्रभाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।

महाद्वीप टूटने लगते हैं।

समुद्र अपनी सीमाएँ बदलने लगते हैं।

वायुमंडल राख से भर जाता है।

सूर्य का प्रकाश धुँधला पड़ जाता है।

और कई राष्ट्र देखते ही देखते समाप्त हो जाते हैं।

अब प्रश्न यह नहीं रह जाता कि सभ्यता संकट में है या नहीं।

प्रश्न यह है कि उसके पास बच निकलने के लिए कितना समय है।

आठ विशेषज्ञों का एक समूह—जिसमें रेमिंगवे और लिज़ियन भी शामिल हैं—एक असंभव प्रतीत होने वाली यात्रा के सामने खड़ा है।

उन्हें आकाशगंगाओं के पार जाने का जोखिम उठाना होगा।

उनके सामने एक ओर विनाश की ओर बढ़ता हुआ ग्रेडियस है और दूसरी ओर अज्ञात ब्रह्मांड।

उनकी आशा का नाम है—इवालेबिया।


क्या मानवता का भविष्य किसी एक ग्रह से जुड़ा है?

यहीं से कहानी का विचार केवल अंतरिक्ष-यात्रा से आगे बढ़ता है।

यदि मनुष्य ने एक ग्रह खो दिया और दूसरे ग्रह पर सभ्यता स्थापित की, तो क्या यह केवल एक घटना थी?

या यह किसी बड़े चक्र का हिस्सा है?

संभव है कि सभ्यताएँ किसी एक ग्रह पर हमेशा के लिए टिकने के बजाय लगातार आगे बढ़ती रहें।

जन्म।

विकास।

विनाश।

प्रवास।

पुनर्निर्माण।

और फिर एक नई सभ्यता।

इस विचार में ब्रह्मांड केवल अंतरिक्ष नहीं रह जाता। वह सभ्यताओं की निरंतर यात्रा का विस्तार बन जाता है।

एक सभ्यता अपने पूर्वजों को भूल सकती है।

पुराना ज्ञान धार्मिक कथाओं में बदल सकता है।

इतिहास मिथक बन सकता है।

और हजारों वर्षों बाद वही भूला हुआ सत्य फिर किसी वैज्ञानिक खोज के माध्यम से सामने आ सकता है।

यही इन्फिनिटी के चक्र का मूल विचार है।


दूसरी दुनिया में भी वही गलतियाँ?

कहानी का सबसे दिलचस्प पक्ष यह है कि इसका प्रश्न केवल काल्पनिक ग्रहों तक सीमित नहीं रहता।

पृथ्वी आज भी पर्यावरणीय संकट, तकनीकी शक्ति, युद्ध और वैचारिक संघर्ष जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है।

ऐसे में कहानी एक असहज सवाल उठाती है—

यदि कोई सभ्यता अपने ही ग्रह को नष्ट कर दे और फिर किसी दूसरे संसार में पहुँच जाए, तो क्या वह अपनी पुरानी गलतियों से कुछ सीखेगी?

या नए ग्रह पर भी वही इतिहास दोहराया जाएगा?

तकनीक जीवन को बचा सकती है, लेकिन क्या वह बुद्धिमत्ता की गारंटी दे सकती है?

ज्ञान को सुरक्षित रखा जा सकता है, लेकिन क्या उसके सही उपयोग की समझ भी सुरक्षित रहती है?

और यदि किसी सभ्यता को अपने अतीत की जानकारी ही न हो, तो क्या वह उसी विनाशकारी चक्र में दोबारा प्रवेश कर सकती है?


एक अंतहीन यात्रा

इन्फिनिटी: द साइकिल ऑफ सिविलाइज़ेशंस मानव उत्पत्ति, अंतरिक्ष, सभ्यता और अस्तित्व को एक ही कथात्मक संरचना में जोड़ती है।

पृथ्वी से ग्रेडियस तक की यात्रा केवल ग्रह बदलने की यात्रा नहीं है। यह स्मृति और विस्मृति के बीच की यात्रा भी है।

यह उस संभावना को सामने रखती है कि किसी सभ्यता का अंत वास्तव में मानवता का अंत न हो।

शायद एक संसार समाप्त होता है और दूसरा संसार शुरुआत बन जाता है।

शायद इतिहास मिटता है और फिर किसी नए युग में वापस सामने आता है।

शायद सभ्यताएँ समाप्त नहीं होतीं—वे केवल अपना रूप, अपना स्थान और अपनी स्मृति बदलती रहती हैं।

और इसी विचार से इन्फिनिटी का चक्र पूरा होता है—

एक सभ्यता समाप्त होती है।

दूसरी जन्म लेती है।

फिर वही यात्रा किसी नए संसार में शुरू हो जाती है।


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