द अफ़गान हाउंड
- ₹330.00
- by
- Book: The Afghan Hound
- Paperback: 352 pages
- Publisher: Gradias Publishing House
- Language: English
- ISBN-13: 978-81-69082-25-9
- Product Dimensions: 22 x 14 x 3 cm
द अफ़गान हाउंड: अफ़गानिस्तान की ज़मीन के नीचे चलती एक खुफ़िया जंग
कुछ मिशन किसी व्यक्ति को खोजने के लिए होते हैं। कुछ किसी संगठन की गतिविधियों का पता लगाने के लिए। और कुछ ऐसे होते हैं, जिनमें मिशन पूरा करने से पहले यह तय करना भी मुश्किल हो जाता है कि कौन जीवित बचेगा।
द अफ़गान हाउंड की दुनिया अफ़गानिस्तान के उन दुर्गम पहाड़ी इलाकों में खुलती है, जहाँ वीरान बस्तियों और पुराने ठिकानों के नीचे सुरंगों का एक ऐसा जाल फैला हुआ है, जिसकी जानकारी बाहरी दुनिया को लगभग नहीं है।
इन्हीं सुरंगों और गुप्त नेटवर्कों की ओर बढ़ता है निहाल सिंह।
शुरुआत में उसका उद्देश्य एक खुफ़िया अभियान के माध्यम से कुछ सवालों के जवाब तलाशना है। लेकिन जैसे-जैसे वह आगे बढ़ता है, मिशन का स्वरूप बदलता जाता है। उसके सामने Amsana का नेटवर्क, गुप्त प्रयोगशालाएँ, भूमिगत स्टेशन, दोहरे एजेंट, स्मृति में हेरफेर, भाड़े के लड़ाके और आपस में टकराती निष्ठाएँ सामने आती हैं।
धीरे-धीरे यह स्पष्ट होने लगता है कि खतरा केवल बाहर से नहीं आ रहा।
खतरा उस व्यवस्था के भीतर भी मौजूद है, जिसे समझने के लिए निहाल वहाँ पहुँचा है।
रुस्तमिया— पहाड़ों के नीचे छिपा संसार
रुस्तमिया इस कहानी में केवल एक स्थान नहीं है।
यह एक ऐसा भूमिगत संसार है, जहाँ प्राचीन संरचनाओं के बीच आधुनिक मशीनें काम कर रही हैं, गुप्त रास्ते पहाड़ों के भीतर फैलते जा रहे हैं और ऐसी गतिविधियाँ चल रही हैं जिनका उद्देश्य बाहर की दुनिया पूरी तरह समझ नहीं पाती।
एक दबी हुई नगरी की खुदाई की जा रही है।
मशीनें पुराने अवशेषों को काट रही हैं।
लापता नागरिकों को जबरन काम में लगाया जा रहा है।
पहाड़ों के नीचे नए रास्ते खुल रहे हैं।
और इन सबके बीच ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनकी वास्तविक निष्ठा किसी को मालूम नहीं।
रुस्तमिया धीरे-धीरे एक ऐसे युद्धक्षेत्र में बदल जाता है, जिसकी अधिकांश लड़ाई धरती के ऊपर नहीं, बल्कि उसके नीचे चल रही है।
निहाल सिंह का बदलता मिशन
निहाल सिंह इस अभियान में जितना आगे बढ़ता है, उतना ही मिशन जटिल होता जाता है।
एक बचाव अभियान के पीछे दूसरा जाल छिपा हो सकता है। जिस व्यक्ति से सहयोग की उम्मीद है, वही किसी दूसरे उद्देश्य के लिए काम कर रहा हो सकता है।
एमसाना के भीतर भी स्थिति स्थिर नहीं है।
संगठन के प्रभावशाली लोग एक-दूसरे के विरुद्ध खड़े होने लगते हैं। भाड़े के लड़ाके बदले की तलाश में हैं। अलग-अलग हित टकरा रहे हैं। और दोहरे एजेंटों के कारण किसी भी योजना पर पूरा भरोसा करना मुश्किल हो जाता है।
निहाल की चुनौती केवल दुश्मन तक पहुँचना नहीं रह जाती।
उसे यह भी समझना है कि वास्तव में मिशन को नियंत्रित कौन कर रहा है।
धरती के नीचे की लड़ाई
कहानी में एक ओर जासूसी और गुप्त अभियानों का तनाव है, तो दूसरी ओर भूमिगत दुनिया में जीवित रहने का संघर्ष।
निहाल को ढहती सुरंगों, हथियारबंद ठिकानों, गुप्त परिसरों, छिपी हुई जेलों और पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है।
लेकिन हर खतरा गोली या विस्फोट के रूप में सामने नहीं आता।
कभी खतरा किसी बातचीत में छिपा होता है।
कभी किसी अधूरे सच में।
कभी किसी ऐसे व्यक्ति में, जो सहयोगी बनकर साथ चल रहा हो।
और कभी खतरा स्वयं वह भूमिगत संरचना बन जाती है, जिसके भीतर पूरा अभियान चल रहा है।
रुस्तमिया का वातावरण
इस कहानी की एक महत्वपूर्ण विशेषता उसका वातावरण है।
बर्फीला पहाड़ी मौसम, वीरान गाँव, अलग-थलग जनजातीय क्षेत्र, पुराने ढाँचे और धरती के नीचे बने स्टेशन मिलकर एक ऐसा परिवेश बनाते हैं जहाँ ख़ामोशी भी असुरक्षित महसूस होती है।
भूमिगत दुनिया कहानी को और गहरा करती है।
एक सुरंग के आगे क्या है, यह निश्चित नहीं। प्राचीन खंडहरों के साथ आधुनिक मशीनें मौजूद हैं। वीरान बस्तियों के नीचे गुप्त सुविधाएँ चल रही हैं। और बाहरी दुनिया से छिपा हुआ एक पूरा नेटवर्क अपने उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रहा है।
जब सब कुछ ढहने लगता है
कहानी के आगे बढ़ने के साथ रुस्तमिया का संकट भी बढ़ता जाता है।
दबी हुई नगरी अस्थिर होने लगती है।
सुरंगें मौत के जाल में बदल जाती हैं।
भूमिगत स्टेशन अराजकता की ओर बढ़ता है।
और अलग-अलग पक्षों के संघर्ष एक ही जगह पर आकर टकराने लगते हैं।
अब सवाल केवल यह नहीं रह जाता कि मिशन सफल होगा या नहीं।
सवाल यह है कि उस भूमिगत दुनिया के ढहने के बाद कौन बच पाएगा।
आग जब धरती के नीचे पहुँचती है, तो पूरा संतुलन बदल जाता है।
एक मिशन, जिसमें भरोसा भी जोखिम है
द अफ़गान हाउंड जासूसी, भूमिगत षड्यंत्र, गुप्त संगठनों, मनोवैज्ञानिक तनाव, जीवित रहने के संघर्ष और तेज़ रफ़्तार एक्शन को एक ही मिशन में जोड़ता है।
कहानी की बेचैनी केवल लड़ाइयों से पैदा नहीं होती। असली तनाव उस अनिश्चितता में है, जहाँ किसी की निष्ठा पूरी तरह स्पष्ट नहीं।
कौन किसके लिए काम कर रहा है?
एमसाना वास्तव में क्या तैयार कर रहा है?
दबी हुई नगरी की खुदाई का उद्देश्य क्या है?
निहाल के आसपास मौजूद लोगों में से कितने सच बोल रहे हैं?
और जब भूमिगत संसार ढहने लगेगा, तब कौन अपनी जगह पर खड़ा रह पाएगा?
द अफ़गान हाउंड उन पाठकों के लिए है जिन्हें खुफ़िया रोमांच, भूमिगत रहस्य, गुप्त संगठन, डबल एजेंट, सर्वाइवल मिशन और वातावरण से भरे एक्शन थ्रिलर पसंद हैं।
रुस्तमिया जल रहा है।
भूमिगत संसार टूट रहा है।
और निहाल सिंह उसी आग की ओर बढ़ रहा है।





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