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अशफ़ाक़ अहमद की एकल किताबें



श्रृंखलाओं से परे: स्वतंत्र कहानियों के अपने संसार

हर कहानी किसी श्रृंखला का हिस्सा नहीं होती और न ही हर काल्पनिक संसार को आगे बढ़ाने के लिए उसके अगले भाग की आवश्यकता होती है। कुछ कहानियाँ अपने आप में पूर्ण होती हैं, लेकिन अपने पीछे ऐसे प्रश्न, भावनाएँ और विचार छोड़ जाती हैं, जो अंतिम पृष्ठ पढ़ने के बाद भी पाठक के मन में बने रहते हैं।

अशफ़ाक़ अहमद की स्वतंत्र कथा-पुस्तकें उनकी कल्पनाशीलता के विभिन्न आयामों को सामने लाती हैं। प्रत्येक कहानी का अपना आधार, अपने पात्र और अपना संसार है, जो अपनी परिस्थितियों, संघर्षों और परिणामों के अनुसार विकसित होता है। किसी एक तयशुदा ढाँचे तक सीमित रहने के बजाय, ये पुस्तकें कथा-साहित्य की विभिन्न संभावनाओं को तलाशती हैं और अलग-अलग विधाओं, भावभूमियों तथा मानवीय अनुभवों से होकर गुजरती हैं।

इन कहानियों के संसार केवल एक ही वास्तविकता तक सीमित नहीं हैं। कुछ रचनाएँ मानवीय व्यवहार के उन अँधेरे पहलुओं में प्रवेश करती हैं, जहाँ महत्त्वाकांक्षा, भय, जुनून, छल और नैतिक निर्णय सामान्य जीवन को असाधारण परिस्थितियों में बदल देते हैं। दूसरी कहानियाँ रहस्य, रोमांच, भय, विज्ञान-कथा और उन अनजानी संभावनाओं का अन्वेषण करती हैं, जो हमारी रोजमर्रा की दुनिया से परे हो सकती हैं।

इन कहानियों के केंद्र में एक महत्त्वपूर्ण रचनात्मक विचार दिखाई देता है—हर कथा का अपना संसार और उस संसार के अस्तित्व का अपना औचित्य होना चाहिए। पात्र केवल घटनाओं को आगे बढ़ाने के साधन नहीं होते। उनके निर्णय, अंतर्विरोध, कमजोरियाँ और इच्छाएँ ही उनके आसपास घटने वाली घटनाओं को आकार देती हैं। कभी संघर्ष का कारण कोई बाहरी खतरा होता है, तो कभी वह मनुष्य के अपने निर्णयों या उन सच्चाइयों से पैदा होता है, जिनका सामना करने से वह बचना चाहता है।

स्वतंत्र पुस्तकें लेखक को रचनात्मक प्रयोग करने की व्यापक स्वतंत्रता भी देती हैं। प्रत्येक पुस्तक किसी नई कल्पना को विकसित करने का अवसर होती है, जिसमें किसी स्थापित श्रृंखला की निरंतरता, संरचना या पाठकों की पूर्व अपेक्षाओं से बँधे रहने की आवश्यकता नहीं होती। इसी स्वतंत्रता के माध्यम से परिचित विषयों को नए दृष्टिकोण से देखने और ऐसी कहानियाँ रचने की गुंजाइश मिलती है, जो अपने आप में संपूर्ण हों।

इन स्वतंत्र कथा-पुस्तकों के साथ अशफ़ाक़ अहमद की एक गैर-काल्पनिक पुस्तक भी है, जिसमें ईश्वर, आस्था और विज्ञान से जुड़े प्रश्नों को एक अलग बौद्धिक दृष्टिकोण से देखने का प्रयास किया गया है। कथा-साहित्य जहाँ काल्पनिक वास्तविकताओं के निर्माण का अवसर देता है, वहीं गैर-काल्पनिक लेखन विचारों और प्रश्नों की प्रत्यक्ष पड़ताल का माध्यम बनता है।

इस प्रकार, उनकी स्वतंत्र कथा-कृतियाँ और गैर-काल्पनिक लेखन दो अलग, लेकिन परस्पर पूरक पक्ष प्रस्तुत करते हैं— कल्पनाशील संसारों की रचना और उस वास्तविक संसार से जुड़े प्रश्नों का अन्वेषण, जिसमें मनुष्य रहता है।

नीचे दी गई संक्षिप्त परिचयात्मक टिप्पणियाँ इन कृतियों की एक झलक प्रस्तुत करती हैं। प्रत्येक पुस्तक की अपनी पहचान और अपना कथ्य है। इनकी विविधता को समझने का सबसे अच्छा तरीका है कि प्रत्येक कहानी के संसार को अलग-अलग जाना जाए।

स्वतंत्र कहानियों के विविध संसार और विचारों की एक अलग यात्रा—जहाँ हर पुस्तक अपनी पहचान, अपना कथानक और अपना अनुभव लेकर सामने आती है।

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Standalone Fiction Books

1. Infinity: The Cycle of Civilizations

यह कहानी है ग्रैडिअस नाम के एक ऐसे ग्रह की जो हमारी ही दुनिया के समरूप है, जहाँ वे इंसान हैं जिनकी पहचान कैथियंस के रूप में होती है। वे हमारे जैसे न हो कर भी हमारे ही जैसे हैं। उनकी दुनिया में भी धर्म और विज्ञान का सतत वैचारिक संघर्ष है। उनकी भी ठीक पृथ्वी जैसी ही मत मान्यतायें हैं... कि यह दुनिया, यह यूनिवर्सल सिस्टम किसी बेंडौरह या एलाह जैसी ईश्वरीय शक्ति ने बनाया है और उसने क्रिस्टोफर और एडविना के रूप में दो कैथियंस ग्रैडिअस पर भेजे थे जिनसे समस्त कैथियंस का जन्म हुआ।

लोग उसी ईश्वरीय शक्ति की इच्छानुसार कर्म करने पर मजबूर हैं लेकिन उसने अच्छाई और बुराई चुनने की छूट दे रखी है और उसी आधार पर कयामत के दिन सबका फैसला करके उन्हें हैवियन यानि स्वर्ग का सुख या शुबूगा यानि नर्क की सजा दी जायेगी। उनके बीच भी अलग-अलग धर्म हैं जैसे इस्लाम के समकक्ष फरायम, हिंदुत्व के समकक्ष वेयराइज्म, क्रिशचैनिटी के समकक्ष निब्रसिज्म या बुद्ध, महावीर, मुहम्मद, ईसा, मूसा, इब्राहीम, नूह के समकक्ष वूडो, वांगटी, थास्बट, बबूसा, रूजा, माइल, लूआ जैसे पैगम्बर और एलाह, बैंडोरह जैसे अलग-अलग मान्यताओं में अलग-अलग संबोधन वाला ईश्वर।

उनमें हममें एक फर्क है कि हम अभी विकास से विनाश की ओर अग्रसर अपने अंत तक पहुंचने के सफर में हैं और वे हमसे कई सौ साल आगे उस प्वाइंट तक पहुंच चुके हैं जहाँ उन्होंने तरक्की तो बहुत कर ली है लेकिन ठीक इंसानी तर्ज़ पर विकास और तकनीक की भूख के चलते अपनी खूबसूरत दुनिया को विनाश की कगार पर पहुंचा दिया है और अब ग्रैडिअस पर कैथियंस के सर्वाइवल की कोई कंडीशन नहीं बची और वे किसी नये ठिकाने की तलाश में हैं।

2. Saavri



यह कहानी सौमित्र बनर्जी की आत्मकथा के रूप में लिखा एक ऐसा दस्तावेज है, जो अंत में एक रोमांचक मोड़ के साथ जब अपनी परिणति पर पहुंचता है तो इस कहानी के उस मुख्य पात्र को यह पता चल पाता है कि रियलिटी में वह अपने कमरे के अंदर अपने बेड पर सोता ही रहा था, लेकिन एक वर्चुअल दुनिया में उसने एक ऐसे रहस्यमयी शख़्स सौमित्र बनर्जी के जीवन के बारे में सबकुछ जान लिया था— जो एक अभिशप्त जीवन को जीते हुए उसी के ज़रिये अपने जीवन से मुक्ति पाता है। कहानी में जो भी है, वह भले एक आभासी दुनिया में चलता है लेकिन कुछ अहम किरदारों का गुज़रा हुआ अतीत है— जिसमें क़दम-क़दम पर रहस्य और रोमांच की भरपूर डोज मौजूद है। सभी कैरेक्टर अपनी जगह होते तो वास्तविक हैं लेकिन वे रियलिटी में रहने के बजाय दिमाग़ के अंदर क्रियेट की गई एक वर्चुअल दुनिया में रहते हैं, जहां उनकी शक्तियां एक तरह से असीमित होती हैं।

यह एक ऐसे मैट्रिक्स की कहानी है, जो बाहर की हकीक़ी दुनिया में नहीं चलता, बल्कि दिमाग़ के अंदर बनाई गई ऐसी दुनिया में चलता है— जहां कहानी के मुख्य ताकतवर पात्र दूसरे किरदारों को उनकी मर्ज़ी के खिलाफ अपनी उस दुनिया में खींच लेते हैं, जहां वे उनके साथ रोमांस भी कर सकते हैं और उन्हें शारीरिक चोट भी पहुंचा सकते हैं। यहां तक कि वे उनकी जान भी ले सकते हैं। अंग्रेज़ दम्पति के यहां पलते सौमित्र बनर्जी को उसके बीसवें बर्थडे की पार्टी कर के घर लौटने के दौरान एक रहस्मयी लड़की सावरी मिलती है, जो उसे उसके जन्म की हकीक़त बताती है। वह उसे उसके पिता के बारे में बताती है और खास उस दिन के लिये उसके पिता की तरफ़ से सुरक्षित की गयी डायरी तक उसे पहुंचाने में मदद करती है— जो उसके पिता सौमिक बनर्जी ने उसके लिये छोड़ी थी।
डायरी से उसे अपने पिता की हकीक़त पता चलती है कि वह कलकत्ते के एक रसूखदार परिवार से सम्बंधित था लेकिन अपने ऊलजलूल शौक के चलते परिवार से अलग हो गया था। उसने असम के अंदरूनी जंगलों में पाई जाने वाली एक मायावी शक्ति अगाशी को साधने में अपना जीवन ही दांव पर लगा दिया था और अपनी उस कोशिश के पीछे इस हाल में पहुंच गया था कि अब न ज़िंदों में ही रहा था न मुर्दों में। उसके साथ अतीत में कुछ उसी के जैसे जुनूनी और काली शक्तियों को साधने के शौकीन लोगों ने, अगाशी को साधने की दिशा में एक ज़रूरी शक्ति पाने की गरज से अफ्रीका के गहरे अंधेरे जंगलों की यात्रा की थी, और उन आदमखोर आदिवासियों से वह ताक़त पाने की कोशिश में सौमिक बनर्जी के सिवा उसके सारे यात्री एक सहरअंगेज़ तजुर्बे के साथ मारे गये थे— लेकिन सौमिक वह ताक़त पाने में फिर भी कामयाब रहा था और अकेला ज़िंदा वापस लौटा था।

इसके बाद उसने असम के जंगलों की यात्रा की थी लेकिन वहां अगाशी की सत्ता चलती थी, जो वास्तविक दुनिया में कहीं थी ही नहीं। वह हज़ारों साल पहले मर चुकी एक ऐसी राजकुमारी थी जो एक अलग ही आयाम में रहती थी। उसके पास उन निशाचरों की एक बेहद खतरनाक सेना थी— जो उसके लिये लगातार शिकार लाते थे। वे सब शिकार इंसानों के ब्लड और फ्लेश पर पलते थे और इससे ही ताक़त हासिल करते थे और इसी तरह से वे ख़ुद को अमर बनाये हुए थे। सौमिक उनसे लड़ने जाता है, अगाशी को साधने जाता है ताकि उसकी बेशुमार शक्तियां और अमरत्व हासिल कर सके… उसकी भरपूर कोशिश के बाद भी उसकी लड़ाई आधे-अधूरे में खत्म होती है। उसे अगाशी की शक्तियां तो नहीं मिलतीं, न ही अगाशी बाकी शिकारों की तरह उसे कंज्यूम कर पाती है— लेकिन उसे वह अमरत्व ज़रूर मिल जाता है, जो उसका एक लक्ष्य था… लेकिन उस अमरत्व के अभिशाप को जब सौमिक झेलता है तो उसे मुक्ति की ख्वाहिश पैदा हो जाती है और इसी ख्वाहिश के चलते उसने संयोग से पैदा हुए बेटे को अपने जीवन के अनुभवों से भरी डायरी के साथ कलकत्ते में सुरक्षित करता है।

अब वह वक़्त आ चुका था, जहां उसके बेटे सौमित्र को पिता का अधूरा काम पूरा करना था और अगाशी पर विजय हासिल करनी थी— और इसीलिये उसे अब असम के उन जंगलों में बुलाया जा रहा था। सावरी उसके पिता के दूत के तौर पर उसे बुलाने आई थी— लेकिन यह पूरा सच नहीं था। वह ख़ुद को इस तरह जाने के लिये तैयार नहीं कर पाता लेकिन रवानगी का वक़्त आने तक वह जैसे किसी जादू से तैयार हो जाता है— उसे अहसास नहीं हो पाता कि उसकी रवानगी में भी उसकी अपनी इच्छा का कोई रोल नहीं था बल्कि उसे कहीं और से तैयार किया गया था। जब वह इस सफर पर निकलता है तब मलिंग के रूप में एक नये कैरेक्टर की एंट्री होती है, जो अपने चेलों के साथ उसे अपने सपनों में खींच लेता है और उसे मारने की कोशिश करता है। सौमित्र के इस सफर का अंजाम क्या हुआ?

3. The Bloody Castle


ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिये टेन मिलियन डॉलर की ईनामी रकम वाला एक रियलिटी शो 'द ब्लडी कैसल' लांच होता है जो हॉरर थीम पर होता है। यह शो सेशेल्स के एक निजी प्रापर्टी वाले हॉगर्ड आइलैंड पर आयोजित होता है जहां हांटेड प्लेस के तौर पर मशहूर किंग्समैन कैसल में कंटेस्टेंट्स को सात दिन और सात रातें गुजारनी होती है और जो भी कंटेस्टेंट सबसे बेहतर ढंग से सामने आने वाली हर चुनौती से लड़ेगा, उस हिसाब से उसे वोट मिलेंगे... सबसे ज्यादा वोट पाने वाला विनर होगा। 'द ब्लडी कैसल' टीम कैसल या आइलैंड के डरावने माहौल के सिवा भी अपनी तरफ से विज्ञान और तकनीक के इस्तेमाल के साथ उन्हें डराने की हर मुमकिन कोशिश करेगी कि उनकी हिम्मत का सख्त इम्तिहान लिया जा सके।

उनके हर पल को रिकार्ड करने के लिये कैसल समेत न सिर्फ़ पूरे आइलैंड पर बेशुमार कैमरे होंगे बल्कि ड्रोन कैमरों की मदद भी ली जायेगी और उनकी सांसों पर भी कान बनाये रखने के लिये उनके गलों में एडवांस किस्म के रेडियो कॉलर पहनाये जायेंगे। उन कंटेस्टेंट्स से टीम कोई भी डायरेक्ट संवाद नहीं करेगी, न ही उन्हें किसी तरह की मदद उपलब्ध कराई जायेगी। कंटेस्टेंट्स को यह सात दिन अपने ढंग से बिताने के लिये पूरी छूट होगी और वे चाहें तो रेप और मर्डर तक कर सकते हैं। शो के पहले सीजन के लिये भारत के अलग-अलग शहरों से आठ लोग चुने जाते हैं जो अलग-अलग फील्ड से थे। दिखने में यही लगता है कि उनका सलेक्शन रैंडमली हुआ है और वे सभी एक दूसरे से एकदम अनकनेक्टेड लोग थे। सारे नियम समझाने के बाद उन्हें आइलैंड पर पहुंचा दिया जाता है और उनका सफर शुरू होता है।
उन्हें पहले दिन तो यह एक रियलिटी शो ही लगता है जहां दिन से लेकर रात तक उन्हें डराने की हल्की-फुल्की कोशिश होती है... लेकिन अगले दिन से ही वे कनफ्यूज होने लगते हैं कि यह वाकई कोई शो था और उन्हें डराने वाली सारी कोशिशें मैनमेड एफर्ट्स थीं। तीसरे दिन से वे वाकई डरना शुरू कर देते हैं और उन्हें अहसास होता है कि दरअसल वहां वाकई पैरानार्मल एक्टिविटीज हो रही थीं और 'द बल्डी कैसल' टीम का कैसल की बुरी शक्तियों से एक समझौता हुआ था। शो के नाम पर उनका शिकार बनाया जा रहा था और एंटरटेनमेंट के नाम पर उनकी दुर्दशा को बेचा जा रहा था। उन्हें यह भी अहसास होता है कि वे रैंडमली नहीं चुने गये बल्कि उन्हें टार्गेट किया गया है और उनसे किसी तरह का बदला लेने के लिये यहां लाया गया है।

वे भले दिखने में एक दूसरे से एकदम असम्बंधित हों मगर अतीत में उनके बीच कोई ऐसा कॉमन पाप घटित हुआ है जिससे वे सब जुड़े हुए हैं और शो का आर्गेनाइजर उसी पाप का शिकार हुआ है जो अब इतने यूनीक तरीके से उनसे बदला ले रहा है। तीसरी रात जब एक कंटेस्टेंट की जान चली जाती है, तब उन्हें अपनी बातों पर यकीन हो जाता है कि वे सब यहां मरने के लिये छोड़े गये हैं। तब वे दिन भर आपस में चर्चा करते शाम को इस नतीजे पर पहुंच जाते हैं कि आखिर वह कौन सा पाप था जिसके तार उन सबसे जुड़े हुए थे और तब उन्हें वह शख्स नजर आता है जिसके बदले का शिकार वे हो रहे थे। उन्हें यकीन हो जाता है कि वह जगह वाकई हांटेड थी और बदले के नाम पर उन्हें वहां मारने ही लाया गया था।

उनकी तकलीफ, उनके संघर्ष और उनकी मौत को रिकार्ड करके शो के नाम पर पूरी दुनिया में बेचा जा रहा था। वे जिंदगी से नाउम्मीद हो जाते हैं लेकिन उस जगह से निकलने या टीबीसी टीम से लड़ने की उनकी हर कोशिश नाकाम हो जाती है। उनकी हर अगली रात कयामत साबित होती है और लगातार खौफ से जूझते सातवें दिन तक सात लोग मारे जाते हैं, लेकिन उनमें से किसी की भी जान सीधे शो वालों ने नहीं ली थी, बल्कि वे सभी अपनी ही वजहों से मारे गये थे... ऐसे में आखिरी शाम अकेली बची लड़की से 'द ब्लडी कैसल' शो को डिजाइन करने वाला शख्स मिल कर उसे कई ऐसी बातें बताता है जो उसके अब तक बने भ्रम को तोड़ देती हैं लेकिन फिर भी सातवीं रात के खौफ का सामना कर पाने की हिम्मत न होने के चलते वह कैसल की छत से कूद जाती है और शो एक अभूतपूर्व कामयाबी के साथ अपना सफर खत्म करता है।

4. Wo Ladki Bholi Bhali Si— Part One


"वो लड़की भोली भाली सी" नाम सुन कर रोमांटिक कहानी लगती है, लेकिन ऐसा है नहीं... यह कहानी यूं तो थ्रिल, रोमांच और सस्पेंस से भरी है, लेकिन चूंकि पूरी कहानी एक ऐसी लड़की पर है जिसकी जिंदगी कहानी के दौरान एक सौ अस्सी डिग्री चेंज होती है, तो बस उसी बदलाव को इंगित करते हुए शीर्षक दिया गया है— वो लड़की भोली भाली सी। शुरुआत तो उसके भोलेपन और उसके शोषण से ही होती है लेकिन फिर मज़बूत होने के साथ वह बदलती चली जाती है।

अब कहानी चूंकि थोड़ी कांपलीकेटेड है तो शुरु करने से पहले सभी पाठकों के लिये कुछ बातों पर गौर करना जरूरी है, जिससे आपको सभी सिरों को समझने में मदद मिलेगी।

सबसे पहली और मुख्य चीज़ यह है कि यह कहानी वेब सीरीज के परपज से लिखी गई है, तो इसके दृश्यों की सिक्वेंस भी उसी तरह से रखी गई है... हालांकि लिखने में नॉवल का फार्मेट ही इस्तेमाल किया गया है न कि स्क्रीनप्ले का, लेकिन फिर भी आपके लिये यह जानना ज़रूरी है कि कहानी कहने का तरीका क्या है, इसी से आप अलग-अलग टाईमलाईन में चलते दृश्यों को ठीक से समझ पायेंगे।

मूलतः कहानी तीन अलग-अलग टाईमलाईन में चलती है जिसमें दो हिस्से एकदम अनकनेक्टेड लग सकते हैं लेकिन ऐसा है नहीं और कहानी के अलग-अलग सभी सिरे कहीं न कहीं एक दूसरे से जुड़े हुए ही हैं। हर टाईमलाईन के साथ तारीख मेंशन की गई है, जिस पर पढ़ते वक़्त आपको खास ध्यान रखना है, अन्यथा आप बुरी तरह कनफ्यूज्ड हो जायेंगे।

अगर कहानी के मुख्य पात्रों की बात की जाये तो कहानी के केंद्र में एक फीमेल पात्र है, जिसके कई रूप हैं और कई नाम हैं, एक से ज्यादा शेड है। विकास अहलावत नाम का एक पुलिस इंस्पेक्टर है, जिसकी अपनी जिंदगी बीवी और उसके आशिक के बीच बुरी तरह उलझी हुई है, लेकिन प्रोफेशनली उसे एक ऐसे मर्डर केस को सॉल्व करना है— जिसमें बंद घर में मकतूल के आसपास मौजूद पाये गये लोगों में कोई भी अपराधी नहीं साबित होता और न उनसे हत्यारे तक पहुंचने में कोई मदद ही मिलती है।

एक क्राईम वर्ल्ड से रिलेटेड शख़्स संदीप चौरसिया है जिसके अतीत में बड़े पेंच हैं। आतिफ, अनिर्बान, सुनील और माधुरी नाम के किरायेदार हैं, और सलीम, दयाल और माया नाम के मेहमान— जिनकी मौजूदगी मगर बेखबरी में मकान मालकिन की हत्या हुई। एक तरफ़ कहानी वर्तमान से अतीत की तरफ़ जाती है, तो दूसरी तरफ़ अतीत से वर्तमान की तरफ़ आती है।

5. Wo Ladki Sayani Si— Part Two



यह कहानी उस सिलसिले को आगे बढ़ाती है जो 'वो लड़की भोली भाली सी' से शुरु हुआ था और अपने अंजाम तक पहुंचती है। सुहाना या संदीप के अतीत में जो कुछ भी हुआ था, वह धीरे-धीरे विकास की इन्क्वायरी के ज़रिये सामने आता रहता है। उन दोनों की ज़िंदगी में ढेरों पेंच थे, ढेरों उलझनें थीं और उनमें सबा को उन सबसे डील करते हुए, एक सरकारी मिशन के तहत अपनी एक जगह बनानी थी— और जिसके लिये वह हर स्तर तक जाती है।

पिछले भाग में जहां कहानी तीन अलग टाईमलाईन में चली थी, वहीं इस भाग में कहानी दो अलग टाईमलाईन में चलती है और जहां सबा के सफ़र के साथ अतीत का एक कालखंड सामने आता रहता है, जहां वह शोषण से भरे बचपन से उबरते हुए एक ताक़तवर संगठन में घुसपैठ करती है और धीरे-धीरे शीर्ष तक पहुंचती है, जहां पहुंच कर उसे फिर एक मौका मिलता है, एक नये अवतार को ग्रहण करने का… वहीं वर्तमान में विकास की खोजबीन के साथ उस अतीत के उलझे हुए सिरे धीरे-धीरे खुलते रहते हैं और एक बिखरी-बिखरी सी कहानी परिपूर्णता लेते हुए सामने आती है।

उस गुमशुदा अतीत में कुछ ऐसा था, जिसने गोवा को अपने मज़बूत पंजों में जकड़े बादेस से मुक्ति तो दिला दी थी, लेकिन अपना वक़्त लेकर, संभलने के बाद वह फिर से खड़े होने की कोशिश करती है और उसके बचे हुए बागी सिपहसालारों को फिर उसके झंडे के नीचे आना पड़ता है। उसी गुमशुदा अतीत में एक बहुत बड़ी रकम भी थे गुम हुई थी, जिसका कोई पता ठिकाना नहीं था और अब जैसे वह सारे लोग उसी की तलाश में थे— जो उसके बारे में जानते थे। वे उस रकम के लिये किसी भी हद से गुज़रने को तैयार थे।

6. Aatashin— Part One


यह एक महागाथा है इंसान और जिन्नात के बीच बनी उस कहानी की, जो जाहिरी तौर पर आपको अलग और अनकनेक्टेड लग सकती है, लेकिन हकीक़त में दोनों के ही सिरे आपस में जुड़े हुए हैं। इंसान की बैकग्राउंड पख्तूनख्वा की है, जहां आप पख्तून पठानों की सामाजिक संरचना के साथ उनके आपसी संघर्ष और जिन्नातों के साथ उनके इंटरेक्शन के बारे में पढ़ेंगे और जिन्नातों की बैकग्राउंड पश्चिमी पाकिस्तान से लेकर तुर्कमेनिस्तान, सीरिया और ओमान के बीच रेगिस्तानी और सब्ज़ मगर बियाबान इलाकों में बसी उनकी चार अलग-अलग सल्तनतों की हैं, जो कभी एक बड़ा साम्राज्य थीं।

कहानी के केंद्र में इन्हीं के बीच के सदाज़ोई, हमार, आफरीदी, ख़सूर कबीलों से सम्बंधित बग़रात, माहेपोरा, कांवाबील, शाहेलार नाम की जागीरों वाले चार परिवार हैं जो अलग-अलग चारों गुट से हैं और स्वात, अपर-लोअर दीर के बीच बसे हैं... और उनके बीच भी ज़बरदस्त अंतर्विरोध है, जहां जान ले लेना एक मामूली बात समझी जाती है और औरत जीतने लायक चीज़ समझी जाती है, जिससे अपना वक़ार (सम्मान) बढ़ाया जा सकता है।
ठीक इनकी तरह ही जिन्नातों की भी भले अलग-अलग छोटी-छोटी ढेरों आबादियां हैं जिन्हें मिला कर अतीत में ग्रेटर अल्तूनिया नाम की एक सल्तनत खड़ी की गई थी, जो एक कर्स (श्राप) के चलते रखआन, अरामिन, पंजशीर और क़ज़ार नाम की चार अलग-अलग टैरेट्रीज में बंट गई। अब हर टैरेट्री न सिर्फ आंतरिक संघर्षों में उलझी हुई है बल्कि चारों आपस में भी जूझ रही हैं। अब जिन्नातों के बारे में भी मोटा-मोटा जान लीजिये कि यह होते क्या हैं और इनकी संरचना कैसी होती है।

किंवदंतियों के अनुसार यह इंसानों से अलग एक एंटिटी होती है जो यूं तो इंसानों से अलग बियाबानों में रहती है, और ज्यादातर इबादत में रत् रहती है। इनकी ज़िंदगी, मौत और पारिवारिक संरचना भी हमारे जैसी हो सकती है। कहा जाता है कि इंसान ही मरने के एक से आठ हज़ार साल बाद जिन्न बन जाता है और एक अलग आयाम में वास करता है जो यूं तो हमारे साथ ही एग्जिस्ट करता है लेकिन हम उसे नहीं देख पाते। हालांकि इनके बहुत से लोग हमारे बीच इंसानी शक्लों में ही रहते हैं, लेकिन हम उन्हें नहीं जान पाते।

मूलतः यह चार कैटेगरी के होते हैं, जिनमें मुख्य प्रजाति इफरित होती है, यह जिन्न ठीक इंसानी तर्ज की सामाजिक संरचना रखते हैं और जिन्नातों से सम्बंधित जो भी कहानियां सुनी जाती हैं, वे इफरित जिन्नातों की ही होती हैं और प्रस्तुत कहानी में भी जो मूल जिन्नात हैं वे इसी कैटेगरी के हैं। इनके सिवा एक मरीद प्रजाति होती है... यह बड़े ताक़तवर और ख़तरनाक होते हैं, हवा में उड़ सकते हैं और इन्हें पानी के पास पाया जा सकता है। इनकी अवधारणा कुछ-कुछ पौराणिक यक्ष के जैसी ही है। इनके सिवा एक प्रजाति सिला भी होती है, इस प्रजाति में सिर्फ जिनी यानि महिला जिन्नात ही होती हैं। यह बेहद ख़ूबसूरत और आकर्षक होती हैं, उतनी ही बुद्धिमान भी... इन्हें यक्षिणी के सिमिलर रखा जा सकता है। जिन्नातों की चौथी मुख्य प्रजाति घूल होती है। यह गोश्तखोर और ख़तरनाक होते हैं और कब्रिस्तानों के आसपास पाये जाते हैं... आप तुलनात्मक रूप से इन्हें पिशाच समझ सकते हैं।

इस कहानी के मूल में तीन प्रेम कहानियां हैं और उससे जुड़ा एक व्यापक संघर्ष है जिसकी जड़ में एक कर्स (श्राप) है। एक प्रेम कहानी वह है जो दो इंसानों के बीच है... एक प्रेम कहानी वह है जो दो जिन्नातों के बीच है और एक प्रेम कहानी वह है जिसमें एक इंसान और एक जिन्नात है... असली खेल इसी कहानी में है, क्योंकि यह एक ऐसी पेशेनगोई (भविष्यवाणी) पर टिकी है जिसके हिसाब से इन दो अलग-अलग दुनियाओं में चलता भीषण संघर्ष इसी की वजह से अपने अंजाम तक पहुंच कर खत्म होना था।

कहानी की बैकग्राउंड उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान की स्वात घाटी है, जो पाकिस्तान से अफगानिस्तान तक फैली है, और टाईमलाईन है जब अमेरिकी फौजों ने अफगानिस्तान छोड़ दिया था और देश के हर इलाके पर तालिबान का कब्ज़ा होता जा रहा था। स्वात, अफगान सीमा से लगा वह इलाका था, जहां तहरीक-ए-तालिबान के कई अलग-अलग गुट सक्रिय थे और पाकिस्तान आर्मी के साथ उनका लगातार संघर्ष होता रहता था। हालांकि इस इलाके में हावी टीटीपी वाले ही रहते हैं और फौज को अक्सर पीछे हटना पड़ता है। यह ग्रुप्स अफगानिस्तान वाले तालिबानियों से अलग होते हैं, और न सिर्फ इनके बीच आपस में झड़पें होती रहती हैं, बल्कि अफगानिस्तान वाले तालिबानियों से भी इनका संघर्ष चलता रहता है।

7. But-e-Aswa— Part Two


'आतशीं' से शुरु कहानी 'बुत-ए-अस्वा' में अपने अंजाम तक पहुंचती है लेकिन उससे पहले यह अपने तक पहुंचने वाले सभी लोगों का बड़ा सख़्त इम्तिहान लेती है। 'बुत-ए-अस्वा' ही इक्कीसवीं सदी में फैले उस सारे फसाद की जड़ था जिसकी शुरुआत ही छठी शताब्दी से हुई थी, जब अल्तूनिया की बुनियाद रखने वाला हिकमतयार ग़ज़ावी और करागाल में अपनी जागीरें खड़े करने वाले चारों पख्तून पठान वक़्त के घोड़े पर सवार हो कर अतीत में सैकड़ों साल पीछे के सफ़र पर गये थे।

'बुत-ए-अस्वा' फारस के रेगिस्तान में स्थित एक पवित्र और प्राचीन शहर अलमात में मौजूद था, उस पर अपनी मेहर की गारंटी देता— लेकिन भविष्य से गया जिन्नात और इंसान का गठजोड़ उस चक्रव्यूह को भेद देता है जो बुत-ए-अस्वा के गिर्द खड़ा था और उसकी हिफाज़त में तैनात सबसे ताक़तवर मरीद आग़ाज़िर भी मात खा जाता है, जिसे हरा पाना न किसी इंसान के बस में था और न किसी जिन्नात के। नतीजे में उसे उन चोरों को ढूंढने के लिये भविष्य में सदियों तक भटकना पड़ता है।

अस्वा का बुत एक रहस्मयी बुत था, जो आकार-प्रकार के हिसाब से जाने किस तरह के जीव को रिप्रजेंट करता था, जिसे लेकर उस तक पहुंचे इंसानों का यह भी मत था कि वह कोई एलियन ऑब्जेक्ट हो सकता है— लेकिन उसमें यह कूवत थी कि वह की गई इच्छाएं पूरी कर सकता था और यह उसी का दिया वरदान था कि ग्रेटर अल्तूनिया नाम का वह जिन्नातों का विशाल साम्राज्य खड़ा हो पाया था… और उसी का यह श्राप भी था कि वह विशाल साम्राज्य आपसी संघर्ष में उलझ कर धीरे-धीरे खत्म हो रहा था।

एक तरफ वे जिन्नातों की हुकूमतें आपस में एक दूसरे के खून की प्यासी होकर लड़ मरने पर आमादा थीं और उनके बीच शाह आलम के रूप में वह ताक़तवर हस्ती उभर रही थी जो वापस उस बिखरी हुई सल्तनत को एक करके अपना परचम लहराना चाहता था— तो उसे रोकने के लिये इंसान और जिन्नात के बीच बनता वह नया गठबंधन भी अपना वजूद पा रहा था, जो स्वात की हरियाली से होते अफगानिस्तान के सहरा तक मिलती चुनौतियों से पार पाते हुए वहां पहुंच रहा था, जहां से सुधार की दिशा में एक अंतिम रास्ता जाता था— अतीत के उस दौर में, जहां से इस बिगाड़ की शुरुआत हुई थी।

उन पांच लोगों पर ही दारोमदार था, उस बुत से जुड़े श्राप को खत्म करने का और न सिर्फ उस साम्राज्य की खोई हुई खुशहाली वापस लाने का, बल्कि साथ ही उन्हें वर्तमान के उस बिगाड़ को भी दुरुस्त करना था, जो सीधे उनकी ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा था और इस श्राप को खत्म करने के लिये उन्हें वक़्त में सदियों पीछे का सफर तय करना था— वे करते भी हैं… लेकिन वहां दूसरी मुसीबतें उनके इंतज़ार में तैयार बैठी थीं। क्या वे अपने मक़सद में कामयाब हो पायेंगे?


8. Zara Sa Ishq


'ज़रा सा इश्क़' एक प्रेम कहानी है, जो धीमी आंच पर पके व्यंजन सी लजीज़ तो है लेकिन पकने की इस प्रक्रिया के दौरान जिन अनुभवों से गुज़रती है, वे इस जोड़े के सब्र और बर्दाश्त की कम परीक्षा नहीं लेते। उनके बीच कोई रिश्ता बनने की उम्मीद में बारह साल का लम्बा वक्फा ऐसे ही इंतज़ार करते हुए गुज़र जाता है— जहां वे एक दूसरे के लिये मन में चाह होते हुए भी पास नहीं आ पाते। यह कहानी है एक बेहद साधारण लड़के की, जो भीड़ में शामिल एक आम सा चेहरा है और जिसकी कोई खास, कोई अलग पहचान नहीं।
जिसे आसपास के लोग नोटिस नहीं करते— कोई लड़की क्या नोटिस करती। जो किसी लड़की को देख कर बस चांद को देख के मचले बच्चे की तरह मचल सकता है, उसे पाने के सपने देख सकता है, लेकिन हाथ बढ़ा कर उसे छू नहीं सकता, क्योंकि चांद उसकी औकात से कहीं बाहर की चीज़ है… अब यह और बात है कि अरमान तो सबके होते हैं, तो उसके भी थे— किसी चांद को पाने के। यह कहानी उस लड़की की है जो एलीट थी, जो सबसे खास थी, जो हर जगह सबकी निगाहों का केन्द्र होती थी, जो बचपन से चूजी थी कि सिर्फ बेस्ट पर उंगली रखती थी— जिसे अनाकर्षक कुछ भी अपने आस-पास चाहिये ही नहीं था।

जिसकी एक निगाह को लड़के तरसते थे। वह चांद पाने की ख्वाहिश नहीं करती थी, वह ख़ुद चांद थी। उसके लिये तो कोई भी लड़का उपलब्ध था और वह चुनती भी है तो हमेशा की तरह बेस्ट, लेकिन इस बेस्ट का विज्ञान जब तक उसे समझ में आ पाता है, तब तक वह तीन बार चोट खा चुकी होती है और उसे पूरी मर्द ज़ात से नफरत हो चुकी होती है।

9. Fake Couple


आसिफ और अरीबा— कहानी के दो मुख्य किरदार, जो एक दूसरे से अजनबी थे, जो एक दूसरे के बारे में कुछ नहीं जानते थे और जिनके मिज़ाज और आदतें ज्यादातर एक दूसरे से अपोजिट थे… उनकी ज़िंदगी में एक मोड़ आता है जब उन्हें मुंबई जैसे महानगर में सिर्फ रहने की ग़रज से एक मनपसंद ठिकाना पाने के लिये आपस में एक समझौता करना पड़ता है— रहने की शर्त के मुताबिक ख़ुद को मियां-बीवी बताने का, दिखाने का, और ज़रूरत पड़े तो इस रिश्ते को साबित करने का।

लेकिन क्या यह कैसे भी आसान था? जब वे एक दूसरे से इतने अलग थे, उनके काम अलग थे, उनके सपने, उनके गोल अलग थे और उनके मिज़ाज अलग थे। कई मौकों पर उनके बीच झगड़ने तक की नौबत आ जाती— लेकिन यह झगड़े भी उन्हें हकीक़ी मियां-बीवी ही साबित करते। शायद ऐसे ही तो होते हैं असलियत के पति-पत्नी— एक दूसरे से अलग, मगर एक दूसरे के साथ निभाने की जद्दोजहद करते। वे असल में जितने अलग दिखने की कोशिश करते थे— उतने ही वे एक लगते थे।

दोनों की आर्थिक स्थिति भी अलग थी— आसिफ जहां एक निम्न वर्गीय परिवार से था, जिस पर इतनी ज़िम्मेदारियां लदी हुई थीं कि वह ख़ुद के बारे में सोचना ही भूल गया था, ख़ुद की जरूरतों को दरकिनार कर दिया था और एक लंबे अरसे से अच्छा बेटा और अच्छा भाई होने की जैसे अंतहीन जद्दोजहद में उलझा हुआ था— वहीं अरीबा एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती, एक अच्छे खाते-पीते मगर ऑर्थोडॉक्स टाईप घराने से ताल्लुक रखती थी, जहां लड़की होने का मतलब ज़रूरत भर पढ़ाई, फिर शादी और चूल्हे-चौके के इर्द-गिर्द सिमटी, पति की सेवा और बच्चों की परवरिश भर होता था और वह इस सोच के ही खिलाफ थी, और अपने घर-खानदान में सबसे अलग कुछ कर दिखाने के ख़ब्त से भरी थी।

10. Survivors of the Earth


जब इंसान अपनी हद से आगे बढ़ कर प्रकृति से अंधाधुंध खिलवाड़ करना शुरु कर देता है, उसके साथ अनुकूलन का सम्बन्ध बनाने के बजाय उसे तहस-नहस करना शुरु कर देता है, तब प्रकृति भी अंततः पलटवार करती है। 

और सबकुछ तहस-नहस कर के रख देती है। यह कहानी है कुदरत के किये उस विध्वंस की, ज़मीन पर फैली उस बर्बादी और तबाही की, जहां अपनी पुरानी केंचुली को उतार के, एक नये रूप का वरण करती इस धरती की एक अलग ही शक्ल उभर कर सामने आती है। 

और यह कहानी है धरती के चार अलग-अलग हिस्सों से निकले उन चार अलग-अलग लोगों की भी, जो अपनी आखिरी हद तक संघर्ष करते हैं और इंसानी जीवन को इस क़यामत के बाद के अगले दौर में ले जाने में कामयाब रहते हैं।

11. CRN-45


एक अनकंट्रोल्ड बायो वैपन जो इंसानी लापरवाही के नतीजे में हवा में रिलीज हो जाता है और देखते-देखते पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेता है। 

और उस महामारी के गुज़रने के बाद आधी आबादी से ज्यादा लोग मारे जा चुके होते हैं और बची हुई दुनिया की शक्ल हमेशा के लिये बदल जाती है।


एक बुरी, बदतर, खामियों से भरी और अचानक आई मेडिकल इमर्जेंसी के आगे दम तोड़ देने वाली लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ, एक नये, एडवांस डेमोक्रेटिक सिस्टम के लिये बिगुल फूंकने वाले कुछ बाग़ी लोगों की कहानी, जो मौत का सामना करके भी यह बदलाव ला कर रहते हैं।

12. JUNIOR


दिल्ली के हृदय में— जहाँ ऐश्वर्य, सत्ता और भ्रष्टाचार साथ-साथ साँस लेते हैं— वहाँ एक युवा रहता है, जिसे दुनिया केवल जूनियर के नाम से जानती है। साधारण परिवार में जन्मा और परिवार की ज़िम्मेदारियों से दबा अशोक ईमानदार रोज़गार की तलाश में राजधानी आता है पर शहर की अपनी योजनाएँ होती हैं। एक क्षणिक, विवश निर्णय उसे उस अदृश्य और निषिद्ध संसार में धकेल देता है, जहाँ उच्चवर्गीय पुरुष एस्कॉर्ट्स की दुनिया चमक के पीछे छिपी रहती है। धीरे-धीरे वह एक जिगोलो बन जाता है, ऐसे धनाढ्य ग्राहकों की इच्छाओं का साधन, जिनकी माँगें केवल शारीरिक निकटता तक सीमित नहीं, बल्कि नियंत्रण, राजनीति और ख़तरे तक फैली होती हैं।

जीवित रहने की कोशिश से शुरू हुई यात्रा धीरे-धीरे भावनात्मक और नैतिक पतन में बदल जाती है। जूनियर एक ऐसे चक्रव्यूह में प्रवेश करता है जहाँ पैसा सहज है पर सुरक्षा भ्रम; जहाँ हर एहसान की कीमत है; जहाँ रसूखदार संरक्षक, प्रभावशाली राजनेता और गुप्त नेटवर्क उन लोगों की तक़दीर लिखते हैं जो उनकी सेवा करते हैं। वासना, एकाकीपन, हिंसा और विश्वासघात के बीच भटकते हुए वह दिल्ली की छाया-अर्थव्यवस्था के उन अँधेरों को देखता है, जो शोषण और खामोशी पर फलते-फूलते हैं।

जब कुछ सनसनीखेज़ वीडियो ऑनलाइन लीक हो जाते हैं, जूनियर अचानक सुर्खियों में आ खड़ा होता है— एक मोहरे की तरह भी, और एक ख़तरे की तरह भी। अब अपराधियों के निशाने पर, अपने ही लोगों के छल से आहत, और एक भ्रष्ट राजनीतिक तंत्र व निर्दयी आपराधिक गठजोड़ के बीच फँसा, उसे केवल जीवित रहने के लिए नहीं, बल्कि अपनी गरिमा पुनः पाने के अधिकार के लिए भी लड़ना पड़ता है। उसकी यात्रा वर्ग, नैतिकता और विकल्प तथा विवशता के बीच की महीन रेखा की भयावह पड़ताल बन जाती है।

जूनियर एक कच्ची, निर्भीक और भावनात्मक रूप से तीव्र कथा है— एक ऐसे युवा जिगोलो की, जिसकी ज़िंदगी रहस्यों और बिकती इच्छाओं से बने संसार में कदम रखते ही संकट के गर्त में उतरने लगती है। यह असंभव परिस्थितियों में अस्तित्व की लड़ाई की कहानी है— उस व्यक्ति की, जो सब कुछ खो देता है, सब कुछ दाँव पर लगा देता है, और अंततः उस दुनिया में प्रायश्चित की एक क्षीण संभावना खोजता है जो उसे कुचल देने पर आमादा है।

यह केवल एक जिगोलो की कहानी नहीं।

यह उन सबकी कहानी है जिन्हें शहर तोड़ देता है… और उन सबकी भी, जो टूटकर भी प्रतिरोध करना जानते हैं।

13. जिहादी परिंदे


दया शंकर दूबे आज की पोर्न एडिक्ट पीढ़ी की नुमाइन्दगी करने वाला एक आम शख्स था जिसे अगर सामान्य भाषा में सेक्स बीमार कहा जाये तो गलत नहीं होगा। क्या आपने आसपास कोई ऐसा किरदार देखा है जो एक तरह से सेक्स बीमार हो। जिसके लिये कोई भी, कैसी भी औरत एक लजीज दोप्याजे गोश्त की हांडी से ज्यादा और कुछ नहीं... औरत का हर अंग जिसमें एक उत्तेजना पैदा करता हो... कंसंट्रेट करते-करते जिसने अपनी कल्पनायें इतनी जीवंत कर ली हों कि वह दुनिया की किसी भी लड़की औरत के साथ एक आभासी संसर्ग में भी वैसा ही मजा पा लेता हो जैसा कोई इंसान हकीकत के संसर्ग में पायेगा।

इस कहानी का किरदार एक ऐसा ही शख्स दया शंकर दूबे है जो लखनऊ का रहने वाला एक आम इंसान है लेकिन जिसकी उन्मुक्त यौनेच्छायें उसे भारत से अमेरिका ले जाती हैं और अमेरिका में दो औरतें उसे ऐसी साजिश के गहरे भंवर में फंसा देती हैं जहां से उसका निकलना लगभग असंभव हो जाता है। लखनऊ से ले कर अमेरिका और योरप तक उसे वह सारा रोमांच, वह सारा सुख मिलता है, जिसका वह भूखा था, जिसके लिये वह किसी भी हद तक जा सकता था, लेकिन यह सब उस परिणति की कीमत थी जिसकी देहरी पर अंततः उसे पहुंचना पड़ा।

एक छोटी सी नौकरी से उसके नये जीवन का जो सिलसिला शुरू होता है वह पैसे और प्रॉपर्टी के लिये बुनी गयी साजिश को पार करते हुए उसे एक जिहादी नेटवर्क के साथ जोड़ कर अंततः मौत के गहरे कुएं में धकेल कर ही ख़त्म होता है। हम हर शख्स को नैतिकता के तराजू पर नहीं तौल सकते... कुछ लोगों के लिये इसकी कोई वर्जना नहीं होती, उन्हें वह सब ही आकर्षित करता है जो अनैतिक हो, अतिवाद हो, अपरिमार्जित हो... जो जिंदगी को अपने ही उन्मुक्त अंदाज़ में जीना चाहते हों, जहाँ कोई बंदिश न हो... दया शंकर दूबे एक ऐसा ही शख्स था।

14. One Missing Day


कभी-कभी इंसान के साथ यह हादसा भी हो जाता है कि किसी झटके या चोट से उसकी मेमोरी का एक छोटा सा हिस्सा ही ग़ायब हो जाये और मुश्किल यह हो कि उसी हिस्से में कुछ बहुत महत्वपूर्ण राज़ दफन हो गये हों। ऐसा ही एक हादसा समीर के साथ होता है जब वह पूरा एक दिन ही भूल जाता है और उस दिन की उसकी गतिविधियां भी कम हंगामाखेज नहीं थीं।

उसकी जान के पीछे ऐसे लोग पड़ गये थे जो उसकी औकात से ही बाहर के लोग थे और उसके लिये वह सारे अजनबी लोग थे... उनका जो सबसे अहम सवाल था, वह भी उसके लिये एक अबूझ पहेली था जिसका कोई जवाब उसके पास नहीं था और उसकी अज्ञानता उसके बड़े अहित का कारण बन रही थी।

उसके पास सिवा इसके कोई चारा नहीं था कि वह किसी तरह हर जानने वाले से उस भूले हुए दिन की बिखरी-बिखरी बातें इकट्ठा कर के उनकी एक सिक्वेंस बनाये और उस अहम पल को खोजने की कोशिश करे जिसमें सबसे महत्वपूर्ण सवाल का जवाब छुपा था... लेकिन क्या यह आसान था?

उसकी दिमाग़ी हालत से वह लोग तो अनजान थे, जिन्हें उससे अपने किसी सामान की रिकवरी करनी थी और समीर की अपनी कोशिशों में वह हर जगह अड़ंगा लगाने की कोशिश कर रहे थे, जिससे उसका काम मुश्किल से मुश्किल होता जा रहा था। उसे उन लोगों से अपनी जान भी बचानी थी और उस खोये हुए दिन से वह राज़ भी खोज निकालना था जो उसकी जान का बवाल बना हुआ था।

15. Lilithiyans


हममें से अधिकांश लोग शायद लिलिथ नाम के उस कैरेक्टर से परिचित न हों, जो मूल बाईबिल के हिसाब से आदम के साथ बनाई गई संसार की पहली नारी थी, लेकिन जो मर्द के नीचे नहीं, बल्कि ऊपर रहना चाहती थी और बजाय मर्द के अपना डॉमिनेंस चाहती थी। उसे एडम के डॉमिनेंस में रहना मंजूर नहीं था, और वह एडम को स्वर्ग में छोड़ पृथ्वी पर भाग आती है— जिसके बाद यहुवा एडम की पसली से ही ईव का सृजन करता है ताकि प्रतीकात्मक रूप से यह स्थापित हो सके कि नारी, नर से बनी है और नर के लिये बनी है, जिससे आगे चल कर मर्द की सत्ता को स्वीकारने में उसे कोई बाधा न आये। सारा संसार इस ईव को बाईबिल के हिसाब से ही पहली औरत मानता है।

लेकिन जैसा कि रिवाज़ है कि इस संसार में जहां हर तरह के लोग हैं— तो उस लिलिथ में विश्वास रखने वाले भी लोग हैं, फिर भले लिलिथ को ऐविल पॉवर या शैतान की संज्ञा क्यों न दी गई हो। जब दुनिया में सीधे शैतान को पूजने वाले समुदाय हो सकते हैं तो लिलिथ के वे उपासक भी हो सकते हैं, जो मानते हैं कि एक दिन लिलिथ अंधेरों से निकल कर आयेगी और सारे संसार पर हुकूमत करेगी। ऐसी ही मान्यता में विश्वास रखने वाले, और उसे देवी की तरह पूजने वाले एक कल्ट का नाम है "लिलिथियंस", जो इस कहानी के केंद्र में है। इस कल्ट के लोग एक मिशन पर हैं और पूरी कहानी उसी मिशन से जुड़े संघर्ष को उकेरती है।

इन लिलिथियंस की कमान संसार के कुछ ऐसे ताक़तवर लोगों के हाथ में है, जिन्हें सामान्यतः इलुमिनाती से जोड़ा जाता है और वे दुनिया के लगभग हर बड़े फैसले में शामिल रहते हैं। उनकी इस दुनिया और इस सृष्टि को लेकर अपनी ही एक अलग थ्योरी है, जिसके अकार्डिंग वे एक ऐसे समझौते से बंधे हैं, जिसके चलते उन्हें पूरी दुनिया के माहौल में किसी न किसी तरह उथल-पुथल मचाये रखनी है, जिससे उस हायर बीईंग को एनर्जी मिलती है, जो फीड करती है लोगों के लालच, डर, नफरत, क्रोध, खून-खराबे और मौतों से— और बदले में इस वर्ग को नवाज़ती है बेशुमार पैसे और ताक़त से। इस थ्योरी के हिसाब से हमारी औकात एक बैक्टीरिया भर की है और हम उस हायर बीईंग के शरीर में वैसे ही वास करते हैं, जैसे हमारे ख़ुद के शरीर में बैक्टीरिया और वायरस अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं।

Story Collection

1. Giddhbhoj


गिद्धभोज भारत की विविध धरती से चुनी गई पंद्रह सशक्त कहानियों का संग्रह है— ऐसे लोगों की कथाएँ जो नैतिकता और जीवित रहने की जद्दोजहद, आस्था और स्वतंत्रता, खामोशी और प्रतिरोध के बीच की नाज़ुक रेखा पर खड़े हैं।



प्यासे खेतों से लेकर भीड़ भरे शहरों तक, भूले-बिसरे जंगलों से पवित्र आँगनों तक फैली ये कहानियाँ साधारण जीवनों में छिपी असाधारण दृढ़ता को उजागर करती हैं।




एक किसान जो असहनीय निर्णयों की दहलीज़ पर आ खड़ा होता है, एक लड़की जो अपने दर्द को प्रतिरोध में बदल देती है, एक विधवा जो दैवी विधान पर प्रश्न उठाती है, एक ग्रामीण जो अपने सूखते पेड़ की अंतिम छाया से चिपका रहता है। 



हर कथा में एक ऐसी चिनगारी सुलगती है जो बुझने से इंकार करती है। वह केवल क्रोध नहीं है, केवल आशा भी नहीं। वह प्रेम, अंतरात

2. Ishq Unlimited


इश्क़ अनलिमिटेड प्रेम की अनगिनत छवियों को समेटे दस अविस्मरणीय कहानियों का संग्रह है— कोमल, टीस भरी, मोक्षदायी और शाश्वत। बर्फ से ढकी हिमालयी सड़कों से लेकर शांत गाँवों और चहल-पहल से भरे शहरों तक, ये कथाएँ दिखाती हैं कि प्रेम दूरी, खामोशी, समय और यहाँ तक कि जन्मों की सीमाओं के पार भी कैसे जीवित रहता है।

इन पन्नों में आपको ऐसे प्रेमी मिलेंगे जो दशकों बाद लौटते हैं, ऐसे दिल जो विश्वासघात के बाद भी फिर से धड़कना सीखते हैं, ऐसी आत्मीयताएँ जो सीमाओं को लाँघ जाती हैं, और ऐसी भावनाएँ जो मरने से इंकार करती हैं। कुछ कहानियाँ हल्की हवा की तरह स्पर्श करती हैं, कुछ भीतर तक झकझोर देती हैं, और कुछ अंतिम पृष्ठ के बाद भी लंबे समय तक साथ बनी रहती हैं।

इन सबके बीच यह संग्रह एक शाश्वत प्रश्न उठाता है— क्या प्रेम सचमुच कभी समाप्त होता है, या वह केवल अपना रूप बदलता है और अनपेक्षित क्षणों में फिर से प्रतिध्वनित हो उठता है?


3. Kahani Junction


कहानी जंक्शन सात सशक्त कहानियों का ऐसा संगम है, जो जीवन की सबसे अंतरंग परतों में छिपी दृढ़ता को उजागर करता है। अँधेरी गलियों से लेकर छोटे शहरों के पार्कों तक, गाँव की ताज़ी सुबहों से लेकर गोवा के धूप भरे तटों तक फैली ये कथाएँ उन पात्रों की गुप्त साहस-यात्रा को रेखांकित करती हैं, जो परिस्थितियों के बोझ तले दब जाने से इनकार कर देते हैं— कभी प्रतिरोध के माध्यम से, कभी कोमलता के सहारे, और कभी स्वयं को धीरे-धीरे पुनः खोजते हुए।

यहाँ स्त्रियाँ समाज की कठोर सीमाओं को चुनौती देती हैं; एक संवेदनशील उपचारक किसी अजनबी की टूटी दुनिया को जोड़ने का प्रयत्न करता है; एक ट्रांसजेंडर स्त्री स्वीकृति की तलाश में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ती है; और एक विधवा अपने भूले-बिसरे सपनों को फिर से थामने का साहस जुटाती है। हर कहानी यह कहती है कि शक्ति हमेशा शोर में नहीं होती। कभी वह खामोशी में पलती है, सहानुभूति में साँस लेती है, और प्रकाश की ओर बढ़ाए गए एक छोटे-से कदम में जीवित रहती है।

भारतीय यथार्थ की मिट्टी में रची-बसी ये कथाएँ वैश्विक भावनाओं से संवाद करती हैं, पाठकों के सामने साहस का एक ऐसा चित्र उपस्थित करती हैं जो सादा भी है, काव्यमय भी, और गहराई से मानवीय भी।

यह संग्रह उन लोगों के लिए है जो मानते हैं कि सबसे क्षीण प्रकाश भी रात की संरचना बदल देने की सामर्थ्य रखता है।


4. Fasaadi Raat


फ़सादी रात अपराध-कथा का ऐसा संग्रह है, जहाँ शोर से अधिक भारी खामोशी होती है। ये कहानियाँ अपराध के क्षण पर नहीं ठहरतीं, बल्कि उसके बाद बची हुई थरथराती उँगलियों, अस्थिर साँसों और उस धड़कन का पीछा करती हैं जो शांत होने से इंकार कर देती है।

काठमांडू की शांत गलियों से लेकर गोवा की छलपूर्ण चमक तक, लखनऊ की तंग राहों से मुंबई और पुणे की अनिद्र रातों तक— ये कथाएँ उन लोगों के साथ चलती हैं जिन्होंने एक ऐसी रेखा पार कर ली, जिसे वे समझते तो थे, पर उसकी गहराई नहीं जानते थे। किसी ने प्रेम में, किसी ने जीवित रहने की विवशता में, और किसी ने इसलिए कि पाप जब एक बार आपका नाम फुसफुसा दे, तो फिर पीछा नहीं छोड़ता।

यहाँ न खलनायक हैं, न नायक। यहाँ साधारण जीवन हैं, जो आवेग और परिणाम के बीच फँस जाते हैं। जब रक्त सूख जाता है और झूठ की परतें उतर जाती हैं, तब जो शेष रह जाता है वह है एक बोझिल खामोशी— अपराधबोध, पश्चाताप और स्मृतियों से भरी हुई।

फ़सादी रात आपको अपराध के मनोवैज्ञानिक पश्चात्-प्रभावों की उस दुनिया में ले जाती है, जहाँ अँधेरा चीखता नहीं, बस धैर्य से प्रतीक्षा करता है।

5. Aaseb


आसेब छह भयावह कथाओं का ऐसा संग्रह है, जो अलौकिक और मनोवैज्ञानिक संसार के बीच की रेखा को धुंधला कर देता है। ये कहानियाँ अचानक चौंका देने वाले दृश्यों के पीछे नहीं भागतीं; बल्कि भीतर की परतों को खोलती हैं, जहाँ स्मृतियाँ, अपराधबोध, भ्रम और पुनरावृत्ति स्वयं अपने भूत बन जाते हैं।

एक अमर काउंट के गोथिक किले की अँधेरी गलियारों से लेकर असम के शापित खेतों तक, अभिशप्त फार्महाउसों से जमी हुई झीलों और साँस लेती हवेलियों तक— हर कथा आतंक का एक अलग चेहरा उजागर करती है। यह भय ऊँची आवाज़ में नहीं चीखता, बल्कि धीमे-धीमे भीतर उतरता है, अंतरंग और असहज करने वाला।

यहाँ भूत हमेशा खिड़की के बाहर नहीं खड़ा होता। कभी वह आपका अपना प्रतिबिंब होता है। कभी वह आपका अतीत। और कभी वह दुनिया, जो आपको मुक्त होने नहीं देती।

वातावरण से भरपूर, धीरे-धीरे सुलगती और गहरे मनोवैज्ञानिक आयामों से युक्त आसेब उन पाठकों के लिए है जो ऐसा हॉरर चाहते हैं जो चीखता नहीं, फुसफुसाता है— जहाँ हर प्रतिध्वनि में खोई हुई किसी चीज़ की आहट है, और हर सन्नाटा एक ऐसी कहानी छिपाए बैठा है जो मरने से इंकार करती है।

Non-Fiction Books

1. God's Existence: Manav Vikas Yatra

यह पुस्तक उस अनंत जिज्ञासा की यात्रा है, जिसने सदियों से मनुष्य को अपने अस्तित्व, ब्रह्मांड, धर्म और ईश्वर को समझने के लिए प्रेरित किया है। मानव इतिहास के शुरुआती चरणों से लेकर आधुनिक वैज्ञानिक युग तक, हर दौर में इंसान ने वही प्रश्न उठाए— मैं कौन हूँ? यह संसार कैसे बना? क्या कोई उच्च शक्ति है? और यदि है, तो उसे कैसे जाना जा सकता है?
इन्हीं सवालों को केंद्र में रखते हुए यह पुस्तक छह विस्तृत खंडों में विभाजित है। पहला खंड मानव विकास यात्रा को सरल और तथ्याधारित रूप में प्रस्तुत करता है—कैसे होमो सेपियन्स ने आग, औज़ार, भाषा और समाज बनाया, और कैसे इन आविष्कारों ने आधुनिक सभ्यता का आधार तैयार किया।
दूसरा खंड धर्मों की उत्पत्ति, उनकी संरचना और उनके विकास की कहानी बयान करता है— एकेश्वरवाद, बहुदेववाद, आदिम आस्थाएँ, दार्शनिक धाराएँ, तथा इन सबके निर्माण में इतिहास, संस्कृति और मनोविज्ञान की भूमिका क्या रही।

तीसरा खंड सबसे चुनौतीपूर्ण है— यह आस्थाओं से जुड़े अंधविश्वासों, अतार्किक मान्यताओं और पाखंडों की वैज्ञानिक व तार्किक समीक्षा प्रस्तुत करता है। इसमें किसी धर्म का अपमान नहीं, बल्कि तथ्यों पर आधारित प्रश्न उठाने की एक शालीन कोशिश है।
चौथा खंड “प्रोग्राम्ड यूनिवर्स” की अवधारणा को समझाते हुए ब्रह्मांड की संरचना, संभावनाओं, मल्टीवर्स सिद्धांतों और कॉस्मिक इंजीनियरिंग जैसे विचारों पर प्रकाश डालता है।
पाँचवाँ खंड यह जांचता है कि यदि ईश्वर जैसा कोई अस्तित्व है, तो वह वैज्ञानिक मानकों पर कैसा दिख सकता है— स्वरूप, ऊर्जा, आयाम, नियम, और उसकी संभावित प्रकृति क्या हो सकती है।
अंतिम और छठा खंड—“सृष्टि सूत्र”— पृथ्वी, सौरमंडल, आकाशगंगा, ब्रह्मांडीय घटनाओं, और जीवन के विकास से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। पुस्तक न किसी निष्कर्ष को थोपती है, न किसी विश्वास को खारिज करती है।
उसका उद्देश्य केवल एक है— पाठकों को सोचने, समझने और अपनी स्वयं की दृष्टि गढ़ने के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करना।



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