गिद्धभोज
- ₹250.00
- by
- Book: Giddhbhoj
- Paperback: 174 pages
- Publisher: Gradias Publishing House
- Language: Hindi
- ISBN-13: 978-81-999293-3-3
- Product Dimensions: 22 x 14 x 2 cm
गिद्धभोज: हमारे समाज और हमारे समय की पंद्रह कहानियाँ
गिद्धभोज पंद्रह कहानियों का ऐसा संकलन है जिसकी जमीन किसी काल्पनिक दुनिया से अधिक हमारे आसपास की वास्तविकता में दिखाई देती है। इन कहानियों में सामाजिक पूर्वाग्रह, अपराधबोध, स्त्री-असमानता, पर्यावरण, जाति-धर्म की रूढ़ियाँ, सत्ता, लालच और मनुष्य के नैतिक निर्णय जैसे विषय अलग-अलग रूपों में सामने आते हैं।
संकलन की शीर्षक कहानी गिद्धभोज एक ऐसे किसान की कथा है जिसे समाज “अन्नदाता” कहता है, लेकिन जिसकी अपनी जिंदगी भुखमरी की कगार पर पहुंच चुकी है। आत्महत्या की ओर बढ़ते इस किसान के सामने एक ऐसा अवसर आता है जहां उसे तय करना है कि वह दूसरों के लिये मसीहा बने या अपनी सामान्य मानवीय जिंदगी को चुने।
अपराधबोध सोशल मीडिया से प्रभावित होकर दिशाहीन होते एक युवा की कहानी है, जिसके निर्णय उसे अपराध की दुनिया तक ले जाते हैं। हत्या के बाद उसका अपराधबोध उसके भीतर लगातार बना रहता है।
एक नई भोर मृत्यु के करीब पहुंच चुकी एक युवती के भीतर पैदा होने वाली उस रोशनी की कहानी है जो उसे हार मानने से रोकती है। उसके विरुद्ध खड़ा सामाजिक दबाव अंततः उसके प्रतिरोध को और मजबूत करता है।
वह कौन थी एक ऐसी लड़की की बेचैन आत्मा के माध्यम से छिपे हुए सच को सामने लाती है जिसकी मृत्यु के पीछे की वास्तविकता अंधेरे में दबा दी गई थी। बदकिरदार स्त्री के चरित्र, इच्छाओं और सामाजिक वर्जनाओं के बीच बने उस दबाव को देखती है जो अंततः विद्रोह को जन्म देता है।
सुर्खाब लैंगिक असमानता और बराबरी के अधिकार की लड़ाई को सामने रखती है, जबकि अधूरी आजादी युवा पीढ़ी के सामने मौजूद पश्चिमी जीवनशैली और भारतीय सामाजिक-यौन वर्जनाओं के विरोधाभास तथा उसके भयावह परिणामों को विषय बनाती है।
दो बूँद पानी भविष्य में पानी के संकट को लेकर एक कठोर तस्वीर प्रस्तुत करती है, जहां जीवन की सबसे सामान्य आवश्यकता ही दुर्लभ हो जाती है। गर्म गोश्त का शौकीन धन और सत्ता से पैदा होने वाली उस मानसिकता पर केंद्रित है जिसमें स्त्री को मनुष्य के रूप में देखने की क्षमता समाप्त हो जाती है।
जंगल का आदमी जमीन और जंगल बचाने वाले मूल निवासियों तथा विकास और पूंजी के नाम पर आगे बढ़ती व्यवस्था के संघर्ष को सामने रखती है। पगली जाति और धर्म की रूढ़ियों के बीच प्रेम और मानवीय रिश्तों की कीमत पर सवाल उठाती है।
इसके बाद जामुन की छाँव बढ़ती आबादी और घटती हरियाली के कारण बिगड़ते पर्यावरण की ओर संकेत करती है। आकर्षण सांवले रंग को लेकर मौजूद सामाजिक पूर्वाग्रह की कहानी है, जबकि खामोश बगावत सामाजिक न्याय की लड़ाई के भीतर मौजूद वैचारिक विरोधाभासों को सामने लाती है।
इद्दत एक व्यथा स्त्री के हिस्से आने वाले धार्मिक-सामाजिक प्रतिबंधों और उन परंपराओं को बदलने की आवश्यकता की ओर ध्यान खींचती है जिन्हें लेकर स्त्री को स्वयं संघर्ष करना पड़ता है।
इस तरह गिद्धभोज की पंद्रह कहानियाँ अलग-अलग विषयों को उठाते हुए एक साझा प्रश्न तक पहुंचती हैं—समाज में मौजूद इन समस्याओं के सामने मनुष्य की अपनी जिम्मेदारी क्या है?
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